नवजात को गोद में लेकर UPPCL दफ्तर पहुंची महिला: 6500 रुपये भरने के बाद भी क्यों कट रही बिजली?
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उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर उपजा विवाद अब एक संवेदनशील और मानवीय संकट में बदल गया है। हाल ही में एक महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने नवजात बच्चे को गोद में लिए तपती धूप में UPPCL (उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड) कार्यालय के बाहर बिलखती नजर आ रही है।

15 दिन में 6500 रुपये दिए, फिर भी अँधेरा महिला का आरोप है कि उसने पिछले 15 दिनों में बिजली के लिए 6500 रुपये का भुगतान किया है। इसके बावजूद उसके घर की बिजली बार-बार काटी जा रही है। महिला के अनुसार, स्मार्ट मीटर का बैलेंस अचानक माइनस में चला जाता है, जिसके कारण बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है।

स्मार्ट मीटर विवाद: आम उपभोक्ता क्यों परेशान? यह घटना केवल एक परिवार की नहीं है। प्रदेश भर में स्मार्ट मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। मुख्य रूप से ये समस्याएं सामने आ रही हैं:

वायरल वीडियो ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्विटर और फेसबुक पर लोग महिला के समर्थन में उतर आए हैं और स्मार्ट मीटर प्रणाली को आम जनता का उत्पीड़न बता रहे हैं। कई लोगों का तर्क है कि यदि तकनीकी खामियों का समाधान नहीं हुआ, तो जनता का भरोसा बिजली विभाग से पूरी तरह उठ जाएगा।

ऊर्जा मंत्री से कार्रवाई की मांग इस घटना के बाद प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा से मामले के संज्ञान की मांग तेज हो गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर सिस्टम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मांग उठ रही है कि गलत बिलिंग की शिकायतों का तत्काल निवारण हो और गरीब परिवारों को राहत प्रदान की जाए।

विभाग का पक्ष और तकनीकी पेच विद्युत विभाग के अधिकारियों का दावा है कि स्मार्ट मीटर बिजली चोरी रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए लगाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी तकनीकी गड़बड़ी वाली शिकायत पर मीटर की जांच और उसे बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि, उपभोक्ता सेवा केंद्रों पर समाधान मिलने की धीमी रफ्तार पर विभाग का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

निष्कर्ष स्मार्ट मीटर अब महज तकनीकी उपकरण नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार ने इस पर त्वरित कदम नहीं उठाए, तो यह असंतोष एक बड़े जन-आंदोलन का रूप ले सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें विभाग द्वारा दिए जाने वाले जवाब और पीड़ित परिवार को मिलने वाली राहत पर टिकी हैं।

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