सऊदी अरब में डोभाल की चाणक्य नीति : क्या पाकिस्तान का इस्लामिक NATO सपना होगा चकनाचूर?
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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत ने अपनी कूटनीति की एक और बड़ी चाल चली है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का सऊदी अरब दौरा महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भारत की स्ट्रैटेजिक डेप्थ को बढ़ाने का एक बड़ा दांव है।

डोभाल की हाई-लेवल मुलाकातें

अजीत डोभाल ने रियाद में सऊदी अरब के एनर्जी मिनिस्टर अब्दुल अजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान और अपने समकक्ष NSA मुसैद अल अयबान से विस्तृत चर्चा की। इस मुलाकात का मुख्य केंद्र क्षेत्रीय स्थिरता, द्विपक्षीय सुरक्षा और ऊर्जा सहयोग रहा। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच भारत का यह कदम अपनी तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए बेहद अहम है।

क्या पाकिस्तान के इस्लामिक NATO के लिए खतरा है यह दोस्ती?

पाकिस्तान लंबे समय से इस्लामिक देशों को एकजुट कर एक इस्लामिक NATO या सुन्नी क्वाड बनाने का सपना देखता रहा है। इसमें सऊदी अरब की आर्थिक शक्ति और पाकिस्तान की परमाणु क्षमता का तालमेल बिठाने का एजेंडा है। लेकिन, भारत के साथ सऊदी अरब की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी इस मंसूबे के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।

भारत के लिए सऊदी क्यों है जरूरी?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 16-20% हिस्सा सऊदी अरब से आयात करता है। इसके अलावा, सऊदी में करीब 40 लाख भारतीय काम करते हैं। पिछले कुछ समय में विदेश मंत्री एस जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के दौरों के बाद, डोभाल की यह यात्रा स्पष्ट करती है कि भारत पश्चिम एशिया में अपने हितों को लेकर अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय है।

पाकिस्तान का धोखा और सऊदी का बदलता नजरिया

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का भरोसा अब सऊदी और यूएई के बीच कम होता जा रहा है। पिछले समय में जब सऊदी के तेल संयंत्रों पर खतरा मंडराया था, तब पाकिस्तान ने अपेक्षित सैन्य समर्थन देने से परहेज किया था। इस घटनाक्रम ने सऊदी अरब को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सुरक्षा के लिए उस पर ज्यादा निर्भर रहने के बजाय भारत जैसे भरोसेमंद साझीदार से रिश्ते मजबूत करना ज्यादा बेहतर है।

ऊर्जा सुरक्षा से लेकर हज यात्रियों तक

डोभाल का यह दौरा एक तरफ जहां भारत की एनर्जी सप्लाई की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, वहीं दूसरी तरफ यह मक्का में हज के लिए जा रहे भारतीय यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को लेकर भी एक बड़ा संकेत है। रियाद में डोभाल का भव्य स्वागत और शीर्ष नेतृत्व से उनकी मुलाकात यह दर्शाती है कि सऊदी अरब भारत को एक रणनीतिक पार्टनर के रूप में देख रहा है, जिसे पाकिस्तान के इस्लामी कार्ड से कहीं अधिक तरजीह दी जा रही है।

कुल मिलाकर, अजीत डोभाल ने अपनी कूटनीतिक चाल से यह संदेश दे दिया है कि भारत अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों में केवल दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक खिलाड़ी है।

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