सैंडाकन में तबाही: भीषण आग ने ली 1,000 घरों की बलि, 9,000 लोग बेघर
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मलेशिया के सैंडाकन शहर में रविवार तड़के एक भीषण अग्निकांड ने पूरे इलाके को राख में बदल दिया है। बाटू सापी के कम्पुंग बहागिया में लगी इस आग ने देखते ही देखते 1,000 घरों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे करीब 9,007 लोग बेघर हो गए हैं। इसे सैंडाकन के इतिहास की सबसे भयावह आग की घटनाओं में गिना जा रहा है।

कैसे फैली आग?

घटना रविवार सुबह करीब 1:30 बजे हुई। यह इलाका समुद्र किनारे लकड़ी के खंभों पर बने घने घरों की बस्ती है। घर एक-दूसरे से बेहद सटे हुए थे, जिसके कारण आग ने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। तेज हवाओं ने आग को और भड़का दिया, जिससे निवासियों को अपना सामान निकालने तक का मौका नहीं मिला।

दमकल विभाग के सामने चुनौतियां

आग बुझाने में दमकलकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बस्तियों की गलियां इतनी संकरी थीं कि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं। इसके अलावा, कम ज्वार (Low tide) होने के कारण समुद्र से पानी खींचने में भी कठिनाई हुई। सैंडाकन और किनाबाटांगन से आए करीब 35 दमकलकर्मियों ने फैक्ट्री हाइड्रेंट और पानी के टैंकरों की मदद से तीन घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 4 बजे आग पर काबू पाया।

गनीमत रही, टला बड़ा जानमाल का नुकसान

राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की भी जान नहीं गई है। हालांकि, अपना सामान बचाने की कोशिश में कुछ लोग मामूली रूप से घायल हुए हैं। पुलिस के अनुसार, इस पूरे इलाके में करीब 1,200 घर थे, जिनमें से 1,000 घर पूरी तरह जलकर खाक हो चुके हैं। फिलहाल केवल 200 घर ही सुरक्षित बचे हैं।

राहत और पुनर्वास की तैयारी

इस इलाके को अब आधिकारिक तौर पर डिजास्टर एरिया घोषित कर दिया गया है। पीड़ितों की मदद के लिए तीन अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं— पीपीआर सैंडाकन, पीपीआर बाटू सापी हॉल और एसके कम्पुंग गैस स्कूल। यहां प्रभावित परिवारों का पंजीकरण किया जा रहा है और उन्हें भोजन एवं जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

जांच शुरू, वजह अभी भी अनसुलझी

आग लगने के स्पष्ट कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। दमकल विभाग की टीमें मामले की जांच में जुटी हैं। स्थानीय विधायक एलियास सानी ने कहा कि सभी प्रशासनिक एजेंसियां पीड़ितों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाने के काम में लगी हैं। वहीं, गांव के प्रमुख शरीफ हसीम ने बताया कि परिवहन की कमी के कारण कई परिवारों को राहत शिविरों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है, इसे सुलझाने की प्राथमिकता दी जा रही है।

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