अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों ने दुनिया को चौंका दिया है। नासा (NASA) की हालिया ब्लैक मार्बल डेटा सीरीज में उत्तर प्रदेश और बिहार का इलाका रात के समय दुनिया के सबसे चमकदार क्षेत्रों में से एक के रूप में उभरा है। यह चमक इतनी तीव्र है कि इसने न्यूयॉर्क, लंदन और शंघाई जैसे वैश्विक महानगरों को भी पीछे छोड़ दिया है।
नासा ने 2014 से 2022 के बीच पृथ्वी पर रात के समय रोशनी में आए बदलावों को दर्शाने वाला एक ग्लोबल मैप जारी किया है। इसे करीब 16 लाख सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करके तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य यह समझना है कि दुनिया के किन हिस्सों में रात की रोशनी बढ़ी है और कहां घटी है।
नक्शे में यूपी और बिहार का बड़ा हिस्सा सोने जैसी चमक बिखेरता हुआ दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण तेजी से होता शहरीकरण, गांवों तक बिजली की पहुंच और घनी आबादी है। पहले जिन इलाकों में घंटों बिजली गुल रहती थी, वहां अब रात भर रोशनी रहती है, जो इस चमक का मुख्य आधार बनी है।
इस नक्शे को तैयार करने के लिए VIIRS (Visible Infrared Imaging Radiometer Suite) नामक एक बेहद संवेदनशील यंत्र का उपयोग किया गया। यह यंत्र इतनी सूक्ष्म रोशनी को भी पकड़ने में सक्षम है, जैसे कि किसी सुनसान सड़क पर लगा एक टोल बूथ। इन तस्वीरों को एक एडवांस्ड एल्गोरिदम के जरिए जोड़कर यह व्यापक डेटा तैयार किया गया है।
सोशल मीडिया पर इस डेटा को लेकर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग इसे भारत के आर्थिक विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के रूप में देख रहे हैं, तो वहीं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह लाइट पॉल्यूशन (प्रकाश प्रदूषण) का संकेत भी है।
अत्यधिक आर्टिफिशियल रोशनी से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है। इससे न केवल रात का आकाश धुंधला होता है, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के जैविक चक्र (Biological Cycle) पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ता है।
नासा के वैज्ञानिकों का मानना है कि रात की यह रोशनी केवल बिजली की खपत नहीं दर्शाती, बल्कि यह देश की आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। यह बताता है कि लोग रात के समय भी काम कर रहे हैं और औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। हालांकि, वैज्ञानिक चेताते हैं कि इस डेटा का विश्लेषण अन्य आर्थिक आंकड़ों के साथ मिलाकर ही सटीक निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
Earth isn’t just getting brighter—some areas are brightening and others are dimming because of changes in nighttime lights.
— NASA Earth (@NASAEarth) April 16, 2026
The finding comes from analyzing 1.16 million NASA satellite images taken every night for nine years. pic.twitter.com/1kFso4QE1k
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