पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय अपने चरम पर है। राज्य की 294 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में (23 और 29 अप्रैल) मतदान होना है। पूरी दुनिया की नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जिस दिन मतगणना के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी। बहुमत के जादुई आंकड़े 148 तक पहुंचने के लिए TMC और BJP के बीच कांटे की टक्कर है।
ममता का लक्ष्मीर भंडार बनाम BJP का प्रहार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी चौथी जीत के लिए लक्ष्मीर भंडार योजना पर भरोसा जता रही हैं। राज्य की 2.2 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे पहुंच रहा पैसा ग्रामीण बंगाल में उनका सबसे बड़ा वोट बैंक बना हुआ है। इसके अलावा, ममता का बंगाली अस्मिता कार्ड आज भी मतदाताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल दिख रहा है।
दूसरी ओर, भाजपा ने 15 साल की TMC सरकार की एंटी-इनकंबेंसी और भ्रष्टाचार को अपना मुख्य हथियार बनाया है। स्कूल भर्ती घोटाले में नेताओं की गिरफ्तारी और केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता भाजपा के चुनावी कैंपेन का केंद्र बिंदु है। इसके अलावा, बांग्लादेश से घुसपैठ और बॉर्डर फेंसिंग जैसे मुद्दों को उठाकर भाजपा ने ध्रुवीकरण की कोशिश की है।
सुवेंदु अधिकारी की भूमिका और BJP की रणनीति भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी, जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम से ममता को मात दी थी, इस बार भी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा बने हुए हैं। फिलहाल भाजपा ने किसी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है, जिसे राजनीतिक विशेषज्ञ एक रणनीतिक कमजोरी भी मान रहे हैं। बावजूद इसके, अमित शाह समेत पार्टी के बड़े नेताओं ने उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण तक अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
दबाव में वामदल और कांग्रेस बंगाल में इस बार वामपंथी दल और कांग्रेस गठबंधन बनाकर लड़ रहे हैं, लेकिन चुनावी समीकरणों में मुकाबला मुख्य रूप से TMC और भाजपा के बीच ही सिमटा हुआ नजर आता है। राहुल गांधी ने TMC और भाजपा दोनों को निशाने पर लिया है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी यह है कि वामदल अपने सिमटते वोट बैंक को बचाने की जद्दोजहद में लगे हैं।
क्या है जनता की असली चिंता? राज्य की राजनीति में भले ही बड़े नेताओं के दावे हावी हों, लेकिन मतदाता के स्तर पर बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। सरकारी नौकरियों की अटकी परीक्षाएं युवाओं के बीच भारी आक्रोश का कारण बनी हुई हैं। इसके साथ ही, CAA (नागरिकता संशोधन कानून) को लेकर राज्य में तनावपूर्ण माहौल है। जहां भाजपा इसे हिंदुओं की सुरक्षा का कवच बता रही है, वहीं ममता इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ एक बड़े षड्यंत्र के रूप में पेश कर रही हैं।
चुनाव आयोग ने भी सख्ती दिखाते हुए राज्य में 865 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध नकदी और सामान जब्त किया है। अब देखना यह होगा कि 4 मई को बंगाल की जनता अपना फैसला किसके पक्ष में सुनाती है।
Election Commission has reported seizures exceeding Rs 865 crore in Tamil Nadu and West Bengal, ahead of Assembly elections and by-elections.
— All India Radio News (@airnewsalerts) April 18, 2026
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