परिसीमन पर ओवैसी का तीखा हमला: दक्षिण भारत को सजा दे रही है मोदी सरकार
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संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ओवैसी ने इसे देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा बताया है।

विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश?

ओवैसी ने सदन में चिंता जताते हुए कहा कि यदि ये तीनों विधेयक कानून बन गए, तो संसद में विपक्ष की आवाज पूरी तरह दब जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का आवंटन उत्तर और दक्षिण के बीच एक बड़ा असंतुलन पैदा करेगा। ओवैसी के मुताबिक, इससे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों का दबदबा बढ़ेगा और कम आबादी वाले सुशासित राज्यों की उपेक्षा होगी।

दक्षिण भारत के योगदान को नजरअंदाज करना गलत

ओवैसी ने दक्षिणी राज्यों के आर्थिक योगदान का हवाला देते हुए कहा कि देश की जीडीपी में इनका 30 फीसदी और टैक्स राजस्व में 21 फीसदी हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुशासन के लिए दक्षिण भारत को सजा दी जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में उत्तर, दक्षिण पर शासन करेगा, जहां दक्षिण केवल सहायता देगा और उत्तर खर्च करेगा।

क्या है परिसीमन का गणित?

सरकार लोकसभा सीटों की संख्या को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 करने की तैयारी में है। परिसीमन विधेयक के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों का पुनर्समायोजन किया जाएगा। ओवैसी का तर्क है कि यह प्रक्रिया जनगणना के बजाय सीधे सरकार के नियंत्रण में होगी, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए सही नहीं है।

अमित शाह ने दी सफाई

विपक्ष के आरोपों पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा आश्वासन दिया है। शाह ने स्पष्ट किया कि परिसीमन से किसी भी दक्षिणी राज्य को नुकसान नहीं होगा। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि 816 सीटों वाले नए सदन में दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर पर ही बनी रहेगी।

शाह का दावा है कि कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर 42, तमिलनाडु की 49 से 59 और केरल की 20 से 30 हो जाएंगी। उनके अनुसार, सीटों में बढ़ोतरी से दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित नहीं होगा, बल्कि उनका प्रभाव पहले की तरह ही बरकरार रहेगा।

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