वेदांता पावर प्लांट हादसा: प्रबंधन पर शिकंजा, 8-10 लोगों पर FIR दर्ज; मृतकों की संख्या 20 पहुंची
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सक्ती के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। घटना के बाद अब प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। डबरा पुलिस थाने में प्लांट प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है।

पुलिस की कार्रवाई: दोषियों पर कसेगा शिकंजा जिला पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने जानकारी दी है कि प्रारंभिक जांच में आपराधिक लापरवाही साफ नजर आ रही है। पुलिस ने फिलहाल 8 से 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी और अन्य संलिप्त व्यक्तियों के नाम सामने आएंगे, उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।

मौत का आंकड़ा 20, शवों का पोस्टमार्टम जारी इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 20 हो गई है। इनमें से 18 श्रमिकों ने रायगढ़ और 2 ने रायपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। अभी भी 15 घायल श्रमिक विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। घटना के तीसरे दिन शवों की शिनाख्त और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है। ज्यादातर मृतक पश्चिम बंगाल और झारखंड के रहने वाले हैं। स्वजन के पहुंचने के बाद शवों को उनके गृह राज्यों के लिए रवाना किया जाएगा।

सरकार सख्त: प्लांट सील, मुआवजे का एलान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने रायगढ़ पहुंचकर घायलों का हाल जाना। उन्होंने बताया कि मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं और फिलहाल प्लांट को सील कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 35 लाख रुपये और घायलों को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, केंद्र और राज्य सरकार से भी अलग-अलग सहायता राशि दी जाएगी।

विपक्ष का हमला: सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में पहुंची कांग्रेस की जांच टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। कांग्रेस नेताओं ने प्रबंधन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यदि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था। विपक्ष ने देर से एफआईआर दर्ज होने पर भी सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

फिलहाल, प्रशासनिक अमला घायलों के उपचार और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद पहुंचाने में जुटा है, जबकि प्लांट प्रबंधन पर कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ता जा रहा है।

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