एक ही सिरिंज से 331 बच्चों को HIV: पाकिस्तान के अस्पताल में मेडिकल महापाप का खुलासा
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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित टौंसा (Taunsa) के सरकारी अस्पताल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की घोर लापरवाही के कारण 331 मासूम बच्चे HIV पॉजिटिव पाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन पर आरोप है कि उन्होंने मेडिकल सुरक्षा के नियमों को ताक पर रखकर एक ही सिरिंज का इस्तेमाल कई बच्चों पर किया।

सीक्रेट ऑपरेशन में खुली पोल अस्पताल के अंदर 32 घंटे से अधिक समय तक रिकॉर्ड किए गए गुप्त फुटेज में मेडिकल हाइजीन का गंभीर उल्लंघन सामने आया है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल के कर्मचारी एक ही सिरिंज और मल्टी-डोज़ वायल (दवा की एक शीशी) का उपयोग कई मरीजों पर कर रहे थे। इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया और मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू की गई है।

आंकड़ों की भयावह सच्चाई नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच टौंसा में कम से कम 331 बच्चों की पहचान HIV पॉजिटिव के रूप में हुई है। जांचकर्ताओं ने जब डेटा का गहन विश्लेषण किया, तो पाया कि संक्रमण का कारण मां से बच्चे में फैलना (vertical transmission) नहीं था। 97 प्रभावित परिवारों में से केवल चार मांएं HIV-पॉजिटिव पाई गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बीमारी फैलने का मुख्य स्रोत अस्पताल की असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं हैं।

मोहम्मद और अस्मा जैसे कई मासूम बने शिकार इस लापरवाही का शिकार हुए आठ वर्षीय मोहम्मद अमीन की दर्दनाक मौत हो गई। उसकी मौत के बाद उसकी बहन अस्मा भी HIV पॉजिटिव पाई गई। परिवार का कहना है कि दोनों बच्चों को यह संक्रमण अस्पताल में रूटीन इलाज के दौरान लगे असुरक्षित इंजेक्शन से हुआ। मोहम्मद की मां ने बताया कि उसके आखिरी दिन बहुत तेज़ बुखार और असहनीय दर्द में बीते।

डॉक्टर की चेतावनी के बाद हरकत में आया प्रशासन इस मामले का खुलासा सबसे पहले स्थानीय डॉक्टर गुल कैसरानी ने किया था। 2024 के अंत में उन्होंने देखा कि उनके क्लिनिक में आने वाले बच्चों में HIV के मामलों में अचानक भारी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने पाया कि प्रभावित 65 से 70 बच्चों का इलाज पहले THQ अस्पताल टौंसा में हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, आधे से अधिक मामलों में संक्रमण का सबसे संभावित कारण खराब और बार-बार इस्तेमाल की गई सुइयां ही थीं।

फिलहाल, इस मामले ने पाकिस्तान की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इस जानलेवा लापरवाही के पीछे कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।

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