नोएडा प्रोटेस्ट: 14 मौतों की खबर निकली अफवाह, यूपी पुलिस का सख्त खंडन- गोलीबारी का दावा पूरी तरह झूठ
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नोएडा हिंसा का सच 13 अप्रैल को नोएडा के इंडस्ट्रियल इलाकों में सैलरी बढ़ोतरी और काम के घंटों को लेकर फैक्ट्री मजदूरों ने उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ जगहों पर गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। इसी अफरा-तफरी के बीच सोशल मीडिया पर एक खबर आग की तरह फैली कि पुलिस फायरिंग में 14 लोगों की मौत हो गई और 32 घायल हो गए।

पुलिस का आधिकारिक बयान सोशल मीडिया पर फैल रही इन खबरों को उत्तर प्रदेश पुलिस ने सिरे से खारिज किया है। नोएडा पुलिस ने साफ किया कि कहीं भी पुलिस फायरिंग नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक, केवल एक स्थान पर हुई हिंसा को काबू में करने के लिए आंसू गैस और न्यूनतम बल का प्रयोग किया गया था। किसी की भी जान नहीं गई है और न ही कहीं गोली चली है।

अफवाह फैलाने वालों पर कानूनी शिकंजा इस भ्रामक दावे को फैलाने के लिए पुलिस ने दो सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ये अफवाहें बाहरी तत्वों द्वारा फैलाई जा रही हैं, जिनका मकसद अशांति फैलाना है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर IT एक्ट और IPC की सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

क्या थीं मजदूरों की मांगें? नोएडा के फेज-2 (होजरी कॉम्प्लेक्स) में हुए इस प्रदर्शन का मुख्य कारण मजदूरों की वाजिब मांगें थीं। वे हरियाणा के बराबर वेतन, 8 घंटे की शिफ्ट और ओवरटाइम के भत्तों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने पत्थरबाजी और आगजनी की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।

प्रशासन की अपील पुलिस और प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी असत्यापित सूचना पर भरोसा न करें। अफवाहें न केवल कानूनन अपराध हैं, बल्कि इससे औद्योगिक क्षेत्र की शांति भी खतरे में पड़ती है। जिलाधिकारी मेधा रूपम ने पहले ही हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि मजदूर अपनी शिकायतें आधिकारिक माध्यमों से दर्ज करा सकें।

अभी की स्थिति क्या है? फिलहाल पूरे नोएडा में स्थिति नियंत्रण में है। प्रभावित इलाकों में PAC तैनात कर दी गई है और पुलिस बल लगातार निगरानी रख रहा है। मजदूरों के प्रतिनिधियों के साथ प्रशासन की बातचीत जारी है ताकि उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जा सके। आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर विश्वास करने की सलाह दी गई है।

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