अमेरिका का बड़ा एक्शन: ईरान से जुड़ा हर जहाज अब निशाने पर, 13 अप्रैल से नाकाबंदी शुरू
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 13 अप्रैल की सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों और उनसे गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है, जिसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर नकेल कसना है।

क्या है अमेरिकी नौसेना का नया आदेश?

केंद्रीय कमान के अनुसार, अमेरिकी नौसेना अब उन सभी जहाजों की तलाशी लेगी और उन्हें रोकेगी जिन्होंने ईरान को किसी भी प्रकार का टोल टैक्स दिया है। यह नाकाबंदी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों पर लागू होगी।

हालांकि, स्पष्ट किया गया है कि जो जहाज ईरान का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। नाविकों को निर्देश दिया गया है कि वे ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने के लिए चैनल 16 के माध्यम से अमेरिकी नौसेना से संपर्क करें।

क्यों बिगड़ी बात?

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही पीस डील पर बात नहीं बन पाई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि 20 घंटों की लंबी बातचीत के बावजूद परमाणु हथियारों के मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकल सका, जिसके बाद उन्होंने नाकाबंदी का कड़ा फैसला लिया।

इसके अलावा, ट्रंप ने ऐलान किया है कि उनकी सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को भी नष्ट करना शुरू करेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का केंद्र बना हुआ है।

ईरान का पलटवार: महंगे तेल के लिए तैयार रहें

ईरान ने इस नाकाबंदी पर सीधे तौर पर चेतावनी दी है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने सोशल मीडिया पर व्यंग्य करते हुए कहा कि इस कार्रवाई का सीधा असर अमेरिका पर ही पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि नाकाबंदी से तेल और गैस की कीमतें आसमान पर पहुंच जाएंगी। कलीबाफ ने स्पष्ट किया कि जो कीमतें आज अमेरिका को अधिक लग रही हैं, जल्द ही वे उन्हें याद करेंगे क्योंकि स्थिति और भी गंभीर होने वाली है।

तनाव का नया दौर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर वर्चस्व की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर है। ईरान जहां इस समुद्री मार्ग को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है और यहां से गुजरने वाले व्यापार पर टैक्स वसूलना चाहता है, वहीं अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रखने की जिद पर अड़ा है। इस नाकाबंदी के बाद अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तनाव और गहरा होने की आशंका है।

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