दूसरी वंदे भारत स्लीपर का ऐलान: बेंगलुरु-मुंबई रूट पर दौड़ेगी ट्रेन, दिल्ली और बिहार को मिली मायूसी
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भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी के यात्रियों को एक बड़ा तोहफा दिया है। देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों को इस बार इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि बाजी दक्षिण और पश्चिम भारत के दो प्रमुख महानगरों ने मार ली है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की है कि दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बेंगलुरु (KSR सिटी) और मुंबई (CSMT) के बीच चलेगी। बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद पी.सी. मोहन ने सोशल मीडिया पर रेल मंत्री का पत्र साझा करते हुए इसकी जानकारी दी है।

22 घंटे का सफर अब होगा 16 घंटे से कम वर्तमान में बेंगलुरु और मुंबई के बीच उद्यान एक्सप्रेस एकमात्र सीधी डेली ट्रेन है। यह 1,134 किलोमीटर की दूरी लगभग 22 घंटे में तय करती है, जिसकी औसत गति 52 किमी प्रति घंटा है। यात्रियों के लिए यह सफर काफी थका देने वाला होता है।

वंदे भारत स्लीपर के आने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। उम्मीद है कि यह ट्रेन 16 घंटे से भी कम समय में अपना सफर पूरा करेगी। सड़कों के जरिए भी इस सफर में 15 से 17 घंटे लगते हैं, ऐसे में वंदे भारत का मुकाबला हवाई यात्रा के करीब होगा।

ट्रेन के समय को लेकर अटकलें हालांकि, ट्रेन की समय-सारणी (टाइमिंग) और स्टॉपेज की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। यात्रियों और जानकारों का सुझाव है कि ट्रेन को बेहतर रिस्पांस के लिए शाम 5 बजे मुंबई से चलना चाहिए, ताकि वह अगले दिन सुबह 9 बजे बेंगलुरु पहुंच सके।

दिल्ली-बिहार क्यों रह गए पीछे? कई लोग उम्मीद कर रहे थे कि दूसरी स्लीपर ट्रेन दिल्ली-पटना या दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रूटों पर मिलेगी। लेकिन रेलवे ने बेंगलुरु और मुंबई के बीच की आवश्यकता को प्राथमिकता दी। इस रूट पर दशकों से किसी प्रीमियम ट्रेन की कमी थी, जिसे देखते हुए सरकार ने इस ऐतिहासिक मांग को पूरा किया है।

वंदे भारत स्लीपर: सुविधाओं का नया दौर इस ट्रेन की खासियत इसकी आधुनिकता है। स्लीपर कोच को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रा के दौरान यात्रियों को झटके महसूस न हों और शोर कम से कम हो।

सुरक्षा के लिए इसमें कवच तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा, बेहतर इंटीरियर, वर्ल्ड-क्लास टॉयलेट और आधुनिक सुविधाओं से लैस ये कोच लंबी दूरी की यात्रा को पहले से कहीं ज्यादा आरामदायक बनाएंगे।

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