ईरान-अमेरिका शांति वार्ता विफल: इस्लामाबाद में किन 4 शर्तों पर टूटा समझौता?
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इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच चल रही मैराथन शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। 15 से 21 घंटे तक चली इस लंबी बैठक के बावजूद दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावित टर्म्स को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण

यह विवाद की सबसे बड़ी वजह रहा। अमेरिका चाहता है कि यह जलमार्ग बिना किसी शर्त और टोल के पूरी तरह खुला रहे। वहीं, ईरान इस पर अपना पूर्ण या आंशिक नियंत्रण चाहता है। ईरान ने युद्ध के दौरान इसे बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा प्रभावित हुआ था। अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर छोड़ने को तैयार नहीं है।

2. लेबनान में सीजफायर का पेंच

ईरान ने वार्ता के दौरान लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तुरंत सीजफायर को अपनी पूर्व-शर्त बना लिया था। अमेरिका और इजरायल ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया। फिलहाल इजरायल लेबनान में अपने हमले जारी रखे हुए है, जिससे ईरान का रुख और कड़ा हो गया है।

3. आर्थिक प्रतिबंध और परमाणु कार्यक्रम

ईरान चाहता है कि उसके ब्लॉक्ड विदेशी एसेट्स रिलीज किए जाएं और आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं। इसके साथ ही उसने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) के अधिकार की मांग रखी। अमेरिका ने ईरान की परमाणु क्षमता से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया और ईरान के 15-पॉइंट प्रस्ताव को अत्यधिक लालची करार दिया।

4. युद्ध का मुआवजा और व्यापक सीजफायर

ईरान ने जंग में हुए नुकसान के लिए मुआवजे और पूरे क्षेत्र में व्यापक सीजफायर की मांग रखी थी। अमेरिका ने इन मांगों को मानने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद वार्ता का अंतिम सिरा भी टूट गया।

अब आगे क्या? ट्रंप की अगली चाल

वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख आक्रामक है। ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि डील न होने की स्थिति में वे सैन्य अभियान फिर शुरू करेंगे। हालांकि, फिलहाल 2 हफ्ते का एक नाजुक सीजफायर लागू है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को क्लियर करने के लिए नौसेना अभियान या लक्षित हवाई हमले (Targeted Strikes) शुरू कर सकता है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका बिना किसी समझौते के वापस लौट रहा है और ईरान के लिए यह समझौता न होना अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक नुकसानदेह है। दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अपनी शर्तों पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।

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