ट्रंप बनाम ईरान: इस्लामाबाद में बातचीत का दिखावा या किसी बड़े धमाके की आहट?
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इस्लामाबाद शांति वार्ता: एक कूटनीतिक जाल? ईरान को अब यह अहसास हो चुका है कि अमेरिका एक बड़े और निर्णायक हमले की तैयारी कर रहा है। लेबनान में बार-बार युद्धविराम की मांग करना ईरान की एक सोची-समझी रणनीति थी, ताकि बातचीत के बहाने अमेरिका को उलझाकर रखा जा सके। लेकिन अमेरिका ने मास्टरस्ट्रोक चलते हुए इजरायल को बातचीत के लिए राजी कर लिया, जिससे ईरान का ‘लेबनान कार्ड’ पूरी तरह फेल हो गया है। अब तेहरान के पास सिर्फ दो ही रास्ते हैं—या तो इस्लामाबाद में अमेरिकी शर्तों को मान ले, या फिर सीधे सैन्य हमले का सामना करे।

ईरान के भीतर मची रार अमेरिका की चुनौती के साथ-साथ ईरान अपने घर के अंदर एक गंभीर संकट का सामना कर रहा है। वाशिंगटन के साथ अस्थायी युद्धविराम को लेकर ईरान की सरकार और उसकी विशेष सैन्य शक्ति (IRGC) के बीच गहरा मतभेद पैदा हो गया है। ईरान की सत्ता और फैसलों पर इस सैन्य बल का भारी प्रभाव है। इनके कमांडरों की मांग है कि अमेरिका को झुकाने के लिए मध्य पूर्व के अरब देशों और होर्मुज स्ट्रेट की घेराबंदी जारी रहनी चाहिए।

प्रतिष्ठा का मुद्दा बनी नफरत ईरान की यह विशेष एलीट फोर्स अमेरिका और इजरायल के साथ किसी भी समझौते के सख्त खिलाफ है। इसके पीछे का कारण व्यक्तिगत नुकसान और कड़वाहट है। पिछले कुछ समय में इजरायली हमलों में ईरान के जो बड़े कमांडर मारे गए हैं, उनमें अधिकतर इसी विशेष सैन्य बल के थे, जबकि ईरान की नियमित थलसेना इन हमलों से लगभग अछूती रही है। इसी कारण, कमांडरों ने बातचीत को अपनी प्रतिष्ठा का मुद्दा बना लिया है।

अहंकार से पराजय का खतरा सैन्य रणनीति के जानकारों का मानना है कि ईरान के कमांडर एक बुनियादी सिद्धांत को भूल रहे हैं— युद्ध में अहंकार गलतियों को जन्म देता है और गलतियां पराजय का कारण बनती हैं। चीन से लगातार मिल रही हथियारों की खेप ने इस सैन्य बल में एक झूठा आत्मविश्वास भर दिया है। उन्हें लगता है कि वे अमेरिका का मुकाबला कर सकते हैं, लेकिन ट्रंप आर-पार के मूड में दिखाई दे रहे हैं।

आगे क्या होगा? इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता सिर्फ एक दिखावा है या वास्तव में कोई समाधान निकलेगा, यह आने वाले कुछ दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। एक तरफ ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख है और दूसरी तरफ ईरान की एलीट फोर्स की जिद। ऐसे में, यदि बातचीत विफल होती है, तो मध्य पूर्व में एक भीषण युद्ध छिड़ना तय माना जा रहा है।

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