वृंदावन नाव हादसा: 10 मौतों का जिम्मेदार कौन? सुरक्षा की अनदेखी और हफ्ता वसूली का काला सच
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मथुरा के वृंदावन में 10 अप्रैल को हुआ नाव हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की घोर लापरवाही का नतीजा है। यमुना की लहरों के बीच पलटे स्टीमर ने 10 परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। कान्हा की नगरी में आस्था के साथ आए श्रद्धालुओं के लिए यह सफर मौत का सफर बन गया।

कैसे पलटा 37 लोगों से भरा स्टीमर? प्राप्त जानकारी के अनुसार, यमुना पर बने अस्थायी पोंटन पुल को जेसीबी मशीन से ठीक किया जा रहा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे स्टीमर की टक्कर जेसीबी से हो गई। असंतुलन बिगड़ने के कारण नाव बीच मझधार में पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उस वक्त नाव में 37 लोग सवार थे, जबकि उसकी क्षमता इससे कहीं कम थी।

सुरक्षा नियमों की उड़ी धज्जियां इस हादसे ने सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। स्टीमर में सवार किसी भी यात्री के पास लाइफ जैकेट नहीं थी। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नाव चलाने वाले चालक के पास न तो कोई वैध लाइसेंस है और न ही प्रशासन के पास उसका कोई रिकॉर्ड। हादसे के बाद से ही चालक फरार है, जो यह साबित करता है कि यमुना में नावों का संचालन पूरी तरह से अवैध और अनियंत्रित है।

हफ्ता वसूली का डरावना खेल स्थानीय सूत्रों ने खुलासा किया है कि यमुना में अवैध स्टीमरों का संचालन वसूली के दम पर फल-फूल रहा है। आरोप है कि नाविकों से नियमित रूप से अवैध वसूली की जाती है। इसी का परिणाम है कि नाविक क्षमता से दोगुना सवारियां ढोते हैं, नावों पर तेज आवाज में डीजे बजाते हैं और रील बनाने के लिए खतरनाक स्टंट करते हैं। एनजीटी के कड़े निर्देशों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी ने इन्हें बेलगाम कर दिया है।

18 करोड़ का क्रूज बना सफेद हाथी ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए 18 करोड़ की लागत से एक आधुनिक क्रूज मंगवाया था। लेकिन आज वह क्रूज किनारे पर खड़ा सफेद हाथी बनकर रह गया है। यदि यह क्रूज संचालित होता, तो शायद श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर इन असुरक्षित और अवैध स्टीमरों में बैठने को मजबूर न होते।

रेस्क्यू ऑपरेशन और वर्तमान स्थिति हादसे के बाद सेना, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) ने मोर्चा संभाला। रात भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पलटी हुई नाव को बाहर निकाल लिया गया है। अब तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 8 लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। 14 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन 5 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में गोताखोर यमुना की गहराईयों को खंगाल रहे हैं।

फिलहाल, अपनों की तलाश में यमुना किनारे बिलखते परिजनों का दर्द यही सवाल पूछ रहा है—क्या हमारी जान की कीमत महज चंद रुपयों की वसूली से कम है?

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