ईरान के साथ जारी तनाव और युद्ध के माहौल के बीच पिछले दो हफ्तों में वैश्विक कूटनीति का केंद्र खाड़ी देश (Gulf Countries) बन गए हैं। दुनिया के शक्तिशाली देशों के प्रमुख आनन-फानन में इस क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ है कि इन देशों को खाड़ी की शरण लेनी पड़ रही है?
इटली की चिंता: मेलोनी का इमर्जेंसी दौरा 4 से 5 अप्रैल के बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सऊदी अरब, कतर और यूएई का दौरा किया। युद्ध के बीच किसी यूरोपीय नेता की यह पहली ऐसी यात्रा थी। इटली अपनी कुल गैस खपत का 10% कतर से आने वाली LNG से पूरा करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव के कारण इटली के 10 बड़े गैस कार्गो फंस गए थे, जिससे भविष्य में ऊर्जा संकट का खतरा पैदा हो गया था।
ब्रिटेन की रणनीति: सुरक्षा और तेल का संतुलन 8 से 10 अप्रैल तक ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सऊदी अरब और यूएई का रुख किया। जेद्दा में उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की और होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित खोलने पर जोर दिया। ब्रिटेन ने सऊदी अरब को अपना अटूट सहयोगी बताते हुए स्काई सैबर एयर डिफेंस सिस्टम तैनात करने का वादा किया है, ताकि क्षेत्र में ब्रिटेन के ऊर्जा हितों की रक्षा की जा सके।
भारत की चुनौती: ऊर्जा आपूर्ति में बड़ी बाधा अब भारत भी इस कूटनीतिक दौड़ का हिस्सा बन चुका है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी कतर दौरे पर हैं, जबकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूएई जा रहे हैं। भारत अपनी कुल LNG जरूरतों का 40% कतर से आयात करता है। ईरान के हमलों में कतर के LNG प्लांट्स को भारी नुकसान पहुँचा है, जिससे हर साल 12.8 मिलियन टन का उत्पादन ठप हो गया है। इसे ठीक होने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है।
खाड़ी देश ही क्यों हैं इतने अहम? इस कूटनीतिक भागदौड़ के पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
अल्प शब्दों में कहें तो, वर्तमान वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में जो देश खाड़ी के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखेगा, वही अपने नागरिकों को ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी दे पाएगा। इन दौरों का सीधा अर्थ है—ऊर्जा की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता की तलाश।
Italian Prime Minister Giorgia Meloni met Saudi Crown Prince Mohammed bin Salman as she arrived in Jeddah on an unannounced visit.
— All India Radio News (@airnewsalerts) April 4, 2026
They reviewed bilateral relations and opportunities for further development. #Italy #SaudiArabia pic.twitter.com/1lWyWAENHH
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