नासा का आर्टेमिस-2 मिशन इतिहास रचने के बेहद करीब है। चांद का चक्कर पूरा करने के बाद मिशन के चारों अंतरिक्ष यात्री अब धरती पर लौटने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अपनी वापसी से पहले उन्होंने अंतरिक्ष से कुछ ऐसा देखा जिसे देखकर पूरी दुनिया दंग है। ओरियन कैप्सूल के कैमरों ने गहरे अंतरिक्ष से एक पूर्ण सूर्य ग्रहण को अपने लेंस में कैद किया है।
वीडियो में क्या दिखा? नासा द्वारा जारी किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे चंद्रमा धीरे-धीरे सूरज के सामने आता है और उसे पूरी तरह ढक लेता है। इसके बाद सूरज के चारों ओर एक चमकदार सफेद रोशनी का घेरा उभरता है, जिसे सोलर कोरोना कहा जाता है। यह दृश्य स्पेसक्राफ्ट के सोलर एरे विंग्स पर लगे कैमरों की मदद से रिकॉर्ड किया गया है।
धरती से कहीं लंबा चला अंधेरा आम तौर पर धरती से देखा जाने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल 2 से 7 मिनट तक चलता है। लेकिन आर्टेमिस-2 के एस्ट्रोनॉट्स के लिए यह अनुभव करीब 54 मिनट तक चला। ओरियन स्पेसक्राफ्ट और चंद्रमा की विशिष्ट गति और स्थिति के तालमेल के कारण अंतरिक्ष यात्रियों को यह दुर्लभ नजारा धरती के मुकाबले कई गुना ज्यादा समय तक देखने को मिला।
चश्मा पहनकर लिया ग्रहण का आनंद नासा ने एक तस्वीर भी साझा की है जिसमें रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसन ओरियन की खिड़की के पास विशेष एक्लिप्स ग्लासेस पहने नजर आ रहे हैं। भले ही वे अंतरिक्ष में थे, लेकिन सूरज की सीधी हानिकारक किरणों से आंखों को सुरक्षित रखने के लिए यह सुरक्षा अनिवार्य थी।
क्यों अहम है यह मिशन? वैज्ञानिकों का मानना है कि गहरे अंतरिक्ष से लिए गए सूर्य ग्रहण के ये दृश्य भविष्य के सोलर मिशनों के लिए अमूल्य डेटा साबित होंगे। इससे सूर्य की खतरनाक किरणों (सोलर फ्लेयर्स) के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी, जो भविष्य में मंगल या उससे दूर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।
अपोलो-13 का रिकॉर्ड टूटा आर्टेमिस-2 मिशन ने न केवल तस्वीरें लीं, बल्कि इतिहास भी रचा है। ओरियन कैप्सूल धरती से करीब 4,06,786 किलोमीटर की दूरी तक गया, जो कि किसी भी इंसान द्वारा तय की गई अब तक की सबसे लंबी दूरी है। इसने 1970 के अपोलो-13 मिशन का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
अब घर वापसी की बारी चांद के चक्कर पूरा करने के बाद अब ओरियन कैप्सूल तेजी से धरती की ओर बढ़ रहा है। नासा के अनुसार, यह कैप्सूल शनिवार सुबह प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंड करेगा। वायुमंडल में प्रवेश करते समय कैप्सूल की रफ्तार 38,000 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा होगी, जिसे नियंत्रित करने के लिए विशेष हीट शील्ड और पैराशूट का उपयोग किया जाएगा। यह मिशन तय करेगा कि क्या इंसान अगले साल आर्टेमिस-3 के जरिए चंद्रमा की सतह पर कदम रख पाएगा या नहीं।
The Artemis II crew had the rare chance to see a solar eclipse from space. 🚀🌘☀️
— NASA (@NASA) April 9, 2026
This video stitches together views from Orion s solar array wing cameras throughout the eclipse, showing the Sun as it disappears behind the Moon, revealing a glowing halo around the lunar disk. pic.twitter.com/d3Z64hVbef
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