गुमला: चाईबासा में एचआईवी पॉजिटिव रक्त चढ़ाने की घटना के बाद उपजे विवाद और ब्लड बैंक सील होने का असर अब गुमला सदर अस्पताल में साफ नजर आ रहा है। नियमों की सख्ती और आपूर्ति बाधित होने के कारण अस्पताल में रक्त का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो गया है।
अस्पताल के डिस्प्ले बोर्ड पर अक्सर शून्य यूनिट खून का आंकड़ा चमकता रहता है, जो मरीजों के परिजनों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं है।
डोनर मौजूद, पर खून की व्यवस्था नहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों के पास डोनर होने के बावजूद उन्हें खून नहीं मिल पा रहा है। घाघरा के विशेश्वर सिंह, जिन्हें कमर दर्द के इलाज के दौरान खून की जरूरत है, उनके परिजन सुदेश सिंह ने एक यूनिट खून दिया, लेकिन अभी भी दो यूनिट की कमी बनी हुई है। अस्पताल प्रबंधन की लचर व्यवस्था के कारण डोनर होने के बावजूद खून उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
रांची जाने की मजबूरी और गरीबी की मार बसिया के मंगन लोहरा के बेटे अमित मिंज ने बताया कि पिता के लिए खून की व्यवस्था करने उन्हें खुद रांची जाना पड़ा। अमित का कहना है कि हर बार रांची जाना उनके जैसे गरीब परिवार के लिए संभव नहीं है। वहीं, मंजू देवी जैसी बुजुर्ग मरीज भी इस संकट का शिकार हैं, जिनका कहना है कि अगर समय पर रक्त नहीं मिला, तो अस्पताल में ही जान चली जाएगी।
व्यवस्था के नाम पर घोर लापरवाही रायडीह के दिगंबर प्रधान का मामला तो और भी गंभीर है। खून की कमी और देरी के कारण अस्पताल में परिजनों और स्वास्थ्य कर्मियों के बीच हाथापाई तक की नौबत आ गई थी। मरीजों और उनके परिजनों का एक ही दर्द है—वे डॉक्टर के पास आकर इलाज के बजाय अपनी मौत का इंतजार करने को मजबूर हैं।
प्रशासन की महादान पहल: क्या सुधरेगा सिस्टम? रक्त की भारी किल्लत को देखते हुए उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित ने मोर्चा संभाला है। प्रशासन ने पूरे जिले में महादान अभियान शुरू करने की घोषणा की है। 11 अप्रैल से जिले के विभिन्न प्रखंडों में लगातार रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे।
प्रशासन का लक्ष्य स्टॉक को जल्द से जल्द दोबारा भरना है। अब देखना यह है कि यह अभियान मरीजों की जान बचाने में कितना कारगर साबित होता है और कब तक गुमला सदर अस्पताल का ब्लड बैंक दोबारा सुचारू रूप से काम करना शुरू करता है।
*झारखंड: सदर अस्पताल में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए 10-11 अप्रैल तक विशेष शिविर लगाया गया है. इसमें जांच, परामर्श और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बच्चों की जांच कर रही है, करीब 500 बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा… pic.twitter.com/83TQ8PGLn8
— Prabhat Khabar (@prabhatkhabar) April 10, 2026
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