ईरान-अमेरिका जंग पर नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी सच साबित: ट्रंप के लिए बिछा है खौफनाक जाल!
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ईरान और खाड़ी देशों के बीच युद्ध की आग ने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच, चीनी-कनाडाई इतिहासकार और एकेडमिक एक्सपर्ट जियांग शुकिन (Jiang Xueqin) की भविष्यवाणियां चर्चा का केंद्र बन गई हैं। उन्हें उनके सटीक विश्लेषण के कारण कई लोग आधुनिक नास्त्रेदमस कह रहे हैं।

ट्रंप की धमकी और युद्धविराम का सच जियांग ने बहुत पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ संघर्ष में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप अपनी बड़ी-बड़ी धमकियों से पीछे हट जाएंगे। यह सच साबित हुआ, जब ट्रंप ने ईरान की सभ्यता को निशाना बनाने की चेतावनी को दरकिनार करते हुए युद्धविराम पर सहमति जताई।

जानें ट्रंप के लिए क्या है खौफनाक जाल जियांग का मानना है कि अमेरिका चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, वह हवाई हमलों के दम पर यह युद्ध नहीं जीत सकता। उनके अनुसार, अंततः अमेरिका को अपने जमीनी बलों को ईरान के भीतर उतारना ही होगा। जैसे-जैसे संघर्ष लंबा खिंचेगा, अमेरिका इस जाल में और गहराई से फंसता चला जाएगा, जिससे निकलना मुश्किल होगा।

ईरान का पलड़ा भारी क्यों? जियांग के अनुसार, लड़ाई सैन्य ताकत की नहीं बल्कि रणनीतिक लचीलेपन (Strategic Flexibility) की है। वे बताते हैं कि ईरान बहुत ही समझदारी से स्थिति को नियंत्रित कर रहा है, जबकि अमेरिका एक घिसी-पिटी और फिक्स्ड योजना पर चल रहा है। ईरान तय कर रहा है कि युद्ध किस दिशा में आगे बढ़ेगा, जो अमेरिका के लिए घातक हो सकता है।

अमेरिका की उल्टे पिरामिड वाली गलती जियांग ने अमेरिकी सैन्य रणनीति की कड़ी आलोचना करते हुए इसे उल्टा पिरामिड बताया है। इस रणनीति में सारा जोर और पैसा हवाई ताकत पर खर्च किया जाता है, जबकि जमीनी सैनिकों की भूमिका कम कर दी जाती है। जियांग का दावा है कि लंबे और जटिल युद्धों में यह दृष्टिकोण हमेशा विफल साबित होता है।

क्या तीसरी भविष्यवाणी बनेगी अमेरिका का अंत? जियांग शुकिन ने 2024 में तीन बड़ी भविष्यवाणियां की थीं, जिनमें से दो सच साबित हो चुकी हैं:

  1. डोनाल्ड ट्रंप का व्हाइट हाउस में लौटना।
  2. अमेरिका का ईरान के साथ सीधे युद्ध में फंसना।

अब तीसरी और सबसे बड़ी भविष्यवाणी यह है कि अमेरिका यह युद्ध हार जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक व्यवस्था हमेशा के लिए बदल जाएगी। उन्होंने इस स्थिति की तुलना पेलोपोनेसियन युद्ध के दौरान एथेंस के विनाश से की है। अब दुनिया की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप इस जाल से बाहर निकल पाएंगे या जियांग की चेतावनी सच साबित होगी।

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