नीतीश की मंद मुस्कान और दिल्ली का नया सियासी समीकरण: कौन होगा JDU चीफ का राइट हैंड ?
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पटना/दिल्ली: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर नए सियासी रण के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। एयरपोर्ट पर उतरते ही उनके चेहरे पर वही पुरानी मंद मुस्कान और नपे-तुले हाव-भाव दिखे, जो अक्सर बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के संकेत देते हैं। उनके आत्मविश्वास ने यह साफ कर दिया है कि बिहार की सियासत में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी पटकथा उनके ही इर्द-गिर्द लिखी गई है।

तीखे सवालों पर नीतीश की चुप्पी दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया ने जब उनसे पूछा कि क्या वे स्वेच्छा से मुख्यमंत्री का पद छोड़ रहे हैं, तो नीतीश कुमार ने बस हाथ जोड़कर मुस्कुराना बेहतर समझा। उन्होंने बातों को टालते हुए बस इतना कहा, सरकार तो अब बनेगी ही। उनका यह जवाब इस बात की पुष्टि है कि बिहार में सत्ता परिवर्तन की पटकथा तैयार है, लेकिन मुख्यमंत्री अपने पत्ते अभी खोलने के मूड में नहीं हैं।

खामोशी में छिपी गहरी राजनीति नीतीश कुमार अपनी गंभीर और नाप-तौल कर बोलने वाली शैली के लिए जाने जाते हैं। चाहे स्थिति कितनी भी तल्ख क्यों न हो, वे अपने चेहरे पर कभी तनाव नहीं आने देते। राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की प्रक्रिया को वे महज एक औपचारिकता बता रहे हैं, लेकिन उनकी यह खामोशी उन अटकलों को और तेज कर रही है कि अब बिहार की कमान किसे सौंपी जाएगी।

दिल्ली में बनी नई पावर-टीम एयरपोर्ट से लेकर 6, कामराज लेन तक की यात्रा ने नीतीश कुमार की नई कोर टीम की झलक दिखा दी है। गाड़ी में संजय झा का अगली सीट पर होना और ललन सिंह का नीतीश कुमार के साथ पीछे की सीट पर बैठना किसी सामान्य तस्वीर से कहीं ज्यादा है। यह संकेत है कि दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में अब यही चेहरे नीतीश के सबसे भरोसेमंद सहयोगी होंगे।

संजय झा और ललन सिंह: तालमेल के नए सूत्रधार संजय झा को जदयू का कार्यकारी अध्यक्ष बनाना नीतीश की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा के साथ पुराना जुड़ाव और दिल्ली की राजनीति में गहरी समझ रखने के कारण संजय झा, नीतीश और भाजपा के बीच ब्रिज का काम करेंगे। वहीं, ललन सिंह समता पार्टी के दौर से ही नीतीश के संकटमोचक रहे हैं। दिल्ली में इन दोनों की मौजूदगी साबित करती है कि नीतीश कुमार राष्ट्रीय पटल पर भाजपा के साथ अपना तालमेल और अधिक मजबूत करना चाहते हैं।

विजय चौधरी: पटना की राजनीति के सेतु दिल्ली और पटना के बीच का संतुलन बनाए रखने के लिए विजय चौधरी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। नीतीश कुमार उन पर अगाध भरोसा करते हैं। वे बिहार की राजनीति को दिल्ली तक जोड़ने वाले एक सशक्त माध्यम बने रहेंगे। नीतीश की यह टीम अब यह सुनिश्चित करेगी कि आने वाले दिनों में बिहार और केंद्र की राजनीति में जदयू का प्रभाव बना रहे।

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