ईरान की हार, ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका की ऐतिहासिक जीत: सीजफायर पर लगी मुहर
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के बाद दो हफ्ते के युद्धविराम (सीजफायर) पर समझौता हो गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने व्हाइट हाउस में पुष्टि की कि ईरान ने खुद युद्ध रोकने की गुहार लगाई है। उन्होंने इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में अमेरिका की एक ऐतिहासिक और निर्णायक जीत करार दिया है।

800 बमों की बारिश और ईरान का सैन्य ढांचा तबाह

रक्षा मंत्री हेगसेथ के अनुसार, मंगलवार रात अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर 800 बम गिराए। इन हमलों ने ईरान के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस को पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया है। हेगसेथ ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता अब कई वर्षों के लिए नष्ट हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई इन हमलों में घायल हुए हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि के लिए अभी और जानकारी का इंतजार है।

ट्रंप ने दिखाया ‘रहम’, पाकिस्तान की अपील पर थमे हमले

इस जीत के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह नष्ट करने के बजाय संयम बरता। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर की विशेष अपील के बाद उन्होंने बमबारी रोकने का निर्णय लिया। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका ने अपने लगभग सभी सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, इसलिए अब शांति वार्ता का समय है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना शर्त

यह सीजफायर पूरी तरह से एक शर्त पर टिका है: ईरान को ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को सुरक्षित और निर्बाध रूप से खोलना होगा। शुक्रवार को इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता होगी। इसमें अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरान की ओर से स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ शामिल होंगे।

ईरान का रुख: हमले रुकेंगे तो हम भी रुकेंगे

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि यदि अमेरिका की ओर से हमले बंद रहते हैं, तो ईरान भी सैन्य कार्रवाई को रोक देगा। फिलहाल, दोनों देशों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रास्ते की अनुमति दे दी है। दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद में होने वाली इस बातचीत पर टिकी हैं, जो भविष्य की शांति की दिशा तय करेगी।

क्या स्थायी शांति संभव है?

हालांकि सीजफायर लागू हो गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे लेकर आशंकित हैं। ईरान की अंदरूनी राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय दबदबे की होड़ और पुरानी कूटनीतिक कड़वाहट स्थायी शांति के रास्ते में बड़ी बाधाएं बन सकती हैं। क्या यह युद्धविराम महज एक अस्थायी राहत है या स्थायी शांति की शुरुआत? यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

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