होर्मुज जलडमरूमध्य खुलने से भारत की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, बाजार में आया जोश
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अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान ने वैश्विक स्तर पर तनाव कम कर दिया है। इस समझौते का सबसे बड़ा परिणाम होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना है, जो वैश्विक व्यापार के लिए एक जीवन रेखा की तरह है। इस खबर के बाद से बाजारों में राहत की लहर दौड़ गई है।

कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट तनाव कम होने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कच्चे तेल के दाम 14.03% घटकर 93.87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गए हैं। तेल की कीमतों में यह कमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है।

शेयर बाजार में रिकॉर्ड उछाल सीजफायर की खबर का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी जबरदस्त दिखा। सेंसेक्स ने 2,600 से अधिक अंकों की छलांग लगाई, वहीं निफ्टी 4% की तेजी के साथ 23,900 के पार पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह 38-39 दिनों के तनाव के बाद स्थिति में सुधार का पहला ठोस संकेत है।

निर्यातकों को मिली बड़ी राहत एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एससी रल्हन के अनुसार, जलडमरूमध्य खुलने से शिपिंग बाधाएं दूर होंगी, माल ढुलाई की दरें कम होंगी और बीमा लागत में कटौती होगी। भारत का मध्य पूर्व के साथ 178 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, जिस पर इस शांति समझौते का सीधा सकारात्मक असर पड़ेगा।

विशेषज्ञों का नजरिया: स्थिरता का इंतज़ार बाजार के जानकारों का मानना है कि भले ही यह एक अस्थायी सीजफायर है, लेकिन इसने निवेशकों का खोया हुआ भरोसा वापस लौटा दिया है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी.के. विजयकुमार ने कहा कि कच्चे तेल की कम कीमतें और ट्रेड रूट का खुलना बाजार के बुल (तेजी) को फिर से सक्रिय करने में मदद करेगा। हालांकि, व्यापारी अभी भी सतर्क हैं क्योंकि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए समझौते का बने रहना अनिवार्य है।

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह लेख केवल सूचनात्मक है और इसे वित्तीय निवेश की सलाह न माना जाए। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।)

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