अमेरिका-ईरान सीजफायर: ट्रंप के सरेंडर पर तेहरान में जश्न, क्या यह सुपरपावर की बड़ी रणनीतिक हार?
News Image

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नाटकीय मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई अंतिम डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले दोनों देशों के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बन गई है। ट्रंप ने इसे अपनी जीत बताया है, लेकिन वैश्विक पटल पर तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है।

तेहरान की सड़कों पर जीत का जश्न

सीजफायर की घोषणा होते ही ईरान में जश्न का माहौल है। राजधानी तेहरान की सड़कों पर लोग बड़ी संख्या में उतर आए हैं और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के झंडे जलाकर इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया है। ईरान का दावा है कि वाशिंगटन ने उनके 10-सूत्रीय प्लान को स्वीकार कर लिया है।

ट्रंप ने घुटने टेक दिए : अमेरिका में मची हलचल

इस समझौते को लेकर अमेरिका के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने तीखे शब्दों में कहा कि ट्रंप ने ईरान के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया है। मर्फी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान को नियंत्रण देना दुनिया के लिए विनाशकारी और असाधारण कदम है। राजनीतिक गलियारों में ट्रंप की इस नीति को उनकी करारी हार के रूप में देखा जा रहा है।

क्या हैं ईरान की वो 10 शर्तें, जिसने बदली बाजी?

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अनुसार, अमेरिका ने उन 10 शर्तों को माना है जो ईरान की रणनीतिक जीत मानी जा रही हैं:

  1. अनाक्रमण समझौता: अमेरिका भविष्य में ईरान पर कोई सैन्य हमला नहीं करेगा।
  2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: इस महत्वपूर्ण जलडमरू मध्य पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहेगा।
  3. यूरेनियम संवर्धन: ईरान को यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति मिल गई है।
  4. प्रतिबंधों का अंत: ईरान पर लगे सभी प्राइमरी और सेकेंडरी प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
  5. UNSC का रुख: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ईरान विरोधी सभी प्रस्ताव रद्द किए जाएंगे।
  6. IAEA बोर्ड का दखल बंद: इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्ताव खत्म होंगे।
  7. आर्थिक मुआवजा: ईरान को नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाएगा।
  8. सैन्य वापसी: इलाके से अमेरिकी फौज को हटाया जाएगा।
  9. क्षेत्रीय संघर्ष पर विराम: हर मोर्चे पर जंग रोकी जाएगी, जिसमें लेबनान के हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई भी शामिल है।
  10. रणनीतिक प्रभुत्व: कुल मिलाकर यह ईरान के लिए एक क्षेत्रीय ताकत के रूप में मान्यता जैसा है।

पाकिस्तान का गुप्त रोल

इस पूरे घटनाक्रम में एक हैरान करने वाली बात सामने आई है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सीजफायर का श्रेय पाकिस्तान को दिया है। उन्होंने इसके लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को धन्यवाद कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते में पाकिस्तान ने पर्दे के पीछे एक बड़ी मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।

क्या यह वाकई अमेरिका की हार है या ट्रंप की कोई सोची-समझी कूटनीतिक चाल? आने वाले दो हफ्ते यह स्पष्ट कर देंगे कि क्या यह शांति स्थायी है या फिर यह सिर्फ एक और बड़े संघर्ष की खामोश शुरुआत है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

शतरंज की बिसात पर बड़ा उलटफेर: प्रग्नानंद की एक चाल और सिंदारोव का ऐतिहासिक सफर

Story 1

जीत के बाद मुकुल चौधरी ने छुए कोच जस्टिन लैंगर के पैर, वायरल वीडियो के पीछे की इमोशनल कहानी

Story 1

शेयर बाजार में जल्द आएगी बड़ी रैली? मॉर्गन स्टेनली ने बताया 95,000 का लक्ष्य

Story 1

IPL 2026: श्रेयस अय्यर की बहन को मिली जान से मारने की धमकी, विवाद के बाद उठाया बड़ा कदम

Story 1

ऑफिस मीटिंग में मैनेजर की बुराई पड़ी भारी, माइक ऑन रह गया और पोल खुल गई!

Story 1

इतिहास रचकर घर लौट रहे आर्टेमिस II यात्री: पृथ्वी पर वापसी की उल्टी गिनती शुरू

Story 1

एमपी में गेहूं खरीदी के साथ सियासी उबाल: कहीं चक्काजाम, तो कहीं कुत्ते को बनाया कलेक्टर

Story 1

असम में 85% रिकॉर्ड वोटिंग: क्या यह बीजेपी की हैट्रिक है या कांग्रेस की सत्ता में वापसी?

Story 1

चाचा अब परदेसी हो गए : दिल्ली पहुंचे नीतीश कुमार, रोहिणी आचार्य का तीखा तंज

Story 1

यूट्यूबर अभिनव अरोड़ा के परिवार पर जानलेवा हमला: बीच सड़क पर हथियारों से तोड़ी कार, दहशत में परिवार