पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस समय अपनी ही सरकार में घिरे हुए हैं। देश की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और लगातार कर्ज लेने की नीति को लेकर उन पर चौतरफा हमले हो रहे हैं। पाकिस्तानी पत्रकार और एक्सपर्ट इरशाद भट्टी ने एक टीवी शो के दौरान शहबाज शरीफ की तीखी आलोचना की है।
शोबाज प्रधानमंत्री और कर्ज का एजेंडा इरशाद भट्टी ने तंज कसते हुए कहा कि शहबाज शरीफ के पास अर्थव्यवस्था सुधारने का कोई विजन नहीं है। उन्हें लोग शोबाज प्रधानमंत्री कहने लगे हैं, क्योंकि उनका एकमात्र एजेंडा दुनिया भर में घूमकर कर्ज मांगना है।
भट्टी का कहना है कि शहबाज शरीफ की एकमात्र उपलब्धि यह कहना है— अलहमदुलिल्लाह, हमें फलां देश से कर्ज मिल गया या आईएमएफ (IMF) आ गया। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री के पास जनता को बताने के लिए विकास का कोई ठोस काम नहीं बचा है।
भारत और इजरायल पर भी टिप्पणी एक्सपर्ट ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पाकिस्तान ने दुनिया के हर देश से कर्ज लेने की कोशिश की है। उन्होंने कहा, अगर भारत और इजरायल से हमारे संबंध अच्छे होते, तो शहबाज शरीफ उनसे भी कर्ज मांगने में पीछे नहीं हटते। यह बयान पाकिस्तान की विवशता और कूटनीतिक विफलता को दर्शाता है।
विदेशी दौरों के बाद भी निवेश में भारी गिरावट भट्टी ने प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहबाज शरीफ जितना संसद में नहीं आए, उससे कहीं ज्यादा उन्होंने विदेश यात्राएं की हैं। 40 से 50 विदेशी दौरों के बावजूद पाकिस्तान में निवेश 41 फीसदी तक गिर गया है। यह बीते 47 वर्षों में सबसे कम विदेशी निवेश है, जो सरकार की नीतियों की विफलता को साबित करता है।
यूएई का कर्ज और गहराता आर्थिक संकट पाकिस्तान इस समय आर्थिक संकट के एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है। हाल ही में, सात साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब पाकिस्तान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ 3.5 अरब डॉलर के कर्ज को रोलओवर (आगे बढ़ाने) करने के समझौते पर विफल रहा है।
यूएई के दबाव के बाद पाकिस्तान को अब यह रकम लौटानी पड़ेगी। यह राशि पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 18 फीसदी है। वर्तमान में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर है, और इस कर्ज अदायगी के बाद तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी दबाव के बीच अर्थव्यवस्था के और चरमराने की आशंका है।
Showbaz only policy is:
— برهان الدین | Burhan uddin (@burhan_uddin_0) April 6, 2026
Alhamdulillah, a certain country gave us a loan Alhamdulillah IMF came.
They just haven’t taken loans from India 🇮🇳 and Israel because our relations with them aren’t good.
If the relations were good, Shwhbaz would have also taken loans from them. pic.twitter.com/kLY1UU6VDy
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