गलवान घाटी संघर्ष के बाद उपजे तनाव और करीब पांच साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच आर्थिक मोर्चे पर बड़ी हलचल देखी गई है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल चीन की आर्थिक राजधानी शंघाई पहुंचा है। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में बर्फ पिघलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
इस बैठक का स्वरूप बहुपक्षीय रहा, जहां भारत और चीन के दिग्गजों के साथ यूरोप के बिजनेस लीडर्स ने भी हिस्सा लिया। फ्यूचर ऑफ इंडिया थीम पर आयोजित इस चर्चा का मुख्य केंद्र वैश्विक तकनीक और भारतीय बाजार का तालमेल रहा। आठ सदस्यीय भारतीय दल में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख उद्योगपतियों के साथ ईवी (EV) चार्जिंग, बैटरी स्टोरेज और एनर्जी ट्रेडिंग क्षेत्र के 6 उभरते स्टार्ट-अप्स शामिल थे।
छह दिनों की इस यात्रा में भारतीय उद्यमियों ने चीन की उन तकनीकों को बारीकी से समझा, जिनमें बीजिंग वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशी गईं:
PHDCCI की सहायक महासचिव शालिनी एस. शर्मा के नेतृत्व में दल ने शंघाई में भारत के महावाणिज्य दूत प्रतीक माथुर से मुलाकात की। माथुर ने बताया कि शंघाई में नया कार्यालय खुलने के बाद यह पहला भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल है। उन्होंने जोर दिया कि चीन के कुल व्यापार में पूर्वी चीन की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है, इसलिए यह सहयोग के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।
शंघाई न्यू एनर्जी इंडस्ट्री एसोसिएशन (SNEIA) द्वारा आयोजित बी2बी (B2B) बैठकों में चीनी कंपनियों का उत्साह देखते ही बना। PHDCCI के CEO डॉ. रंजीत मेहता ने कहा कि चीन रिन्यूएबल एनर्जी में लीडर है और भारत अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। यह साझेदारी वैश्विक जलवायु लक्ष्यों और तकनीक की लागत को कम करने में मील का पत्थर साबित होगी।
इस यात्रा का सीधा लाभ भारतीय उद्यमियों को मिलता दिख रहा है। गुरुग्राम स्थित ई-जीरो मोबिलिटी के संस्थापक विनीत कुमार ने बताया कि इस यात्रा से उनके प्रोजेक्ट की टाइमलाइन में 16 सप्ताह की कमी आई है, क्योंकि उन्हें सीधे चीनी सप्लायर्स और इंजीनियरिंग पार्ट्स तक पहुंच मिली है। इसी तरह, अहमदाबाद और लखनऊ की कंपनियों ने भी इसे क्लीन एनर्जी क्षेत्र में गेम-चेंजर बताया है।
सीमा पर कूटनीतिक चुनौतियां अभी भी कायम हैं, लेकिन इस बिजनेस डेलिगेशन की यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीन एनर्जी और भविष्य की तकनीक के लिए दोनों देश एक-दूसरे की जरूरत बन सकते हैं। चीनी दूतावास द्वारा इस मुलाकात की तस्वीरें साझा करना यह दर्शाता है कि बीजिंग भी भारत के विशाल बाजार और उभरते स्टार्ट-अप ईकोसिस्टम के साथ फिर से जुड़ने को लेकर उत्सुक है।
*First Indian business delegation to visit China in 5+ years just wrapped up in Shanghai.
— Yu Jing (@ChinaSpox_India) April 6, 2026
Focus: EVs. Clean energy. Supply chains.
The thaw is real. 🇨🇳🇮🇳 #ChinaIndia #PHDCCI pic.twitter.com/eXyKztTPjX
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