इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक नई और खतरनाक दिशा में मुड़ गया है। इजरायली हमलों के निशाने पर अब ईरान के शैक्षणिक संस्थान आ गए हैं। इस कड़ी में ईरान की प्रतिष्ठित शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी पर हुई बमबारी ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है।
ईरान ने इस हमले को महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि अपनी वैज्ञानिक क्षमता पर सीधा प्रहार माना है।
शरीफ यूनिवर्सिटी को दुनिया भर में ईरान के एमआईटी (MIT) के रूप में जाना जाता है। ईरान का मिसाइल प्रोग्राम, ड्रोन तकनीक और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम इसी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के दम पर खड़ा है।
ईरान का आरोप है कि इजरायली-अमेरिकी हमलावरों ने जानबूझकर शिक्षा के इस केंद्र को निशाना बनाया है ताकि ईरान की वैज्ञानिक प्रगति को कुचला जा सके। तेहरान का मानना है कि दुश्मन अब हताशा में उन केंद्रों को खत्म करना चाहता है जो भविष्य की ईरानी शक्ति का आधार हैं।
इस हमले के बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और आक्रामक पोस्ट साझा की। उन्होंने 1400 साल पुरानी एक हदीस (पैगंबर मोहम्मद का कथन) को याद करते हुए लिखा:
पैगंबर मोहम्मद ने कहा था कि अगर ज्ञान सुदूर नक्षत्रों (प्लेयाड्स) में भी होता, तो भी ईरानी उसे हासिल करने की क्षमता रखते।
इस कथन के जरिए ईरान ने दुनिया को संदेश दिया है कि उनकी वैज्ञानिक शक्ति बाहरी मदद या संसाधनों पर निर्भर नहीं है, बल्कि यह उनके डीएनए और गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है। इमारतें गिराकर ज्ञान को खत्म नहीं किया जा सकता।
ईरान ने अपने बयान में स्पष्ट कर दिया है कि वह अब अपनी स्ट्रेटेजिक पेशेंस यानी रणनीतिक संयम की नीति को त्याग चुका है। यूनिवर्सिटी पर हमले को ईरान ने अपनी रेड लाइन घोषित किया है।
विदेश मंत्री ने अपने संदेश के अंत में दुश्मन को चेतावनी देते हुए कहा, हमलावर जल्द ही हमारा पराक्रम देखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अब इस जंग को एक पवित्र संघर्ष का रूप दे दिया है, जिससे युद्ध के और भी अधिक उग्र होने की आशंका बढ़ गई है।
ईरान का आरोप है कि इससे पहले भी उनके शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याएं इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद द्वारा कराई गई हैं। अब विश्वविद्यालयों को निशाना बनाकर दुश्मन ने यह साबित कर दिया है कि वे ईरान को तकनीकी रूप से पीछे धकेलना चाहते हैं।
दुनिया के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान की यह कसम परमाणु हथियारों और मिसाइल तकनीक की होड़ को एक खतरनाक मोड़ पर ले जाएगी। ईरान का संदेश साफ है—वे इमारतें ढहा सकते हैं, लेकिन उस ज्ञान को नहीं छीन सकते जिसे पैगंबर ने सदियों पहले ईरानियों की नियति बताया था।
Israeli-U.S. aggressors have bombed the MIT of Iran. This follows attacks on other universities.
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 6, 2026
1,400 years ago, Prophet Muhammad (PBUH) said that even if knowledge was situated in the distant Pleiades, Iranians would be capable of attaining it.
Aggressors will see our might. pic.twitter.com/Dn3hSCaBNv
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