TMC के उर्दू मैनिफेस्टो पर घमासान: ओवैसी ने ममता बनर्जी को बताया दोहरे चरित्र वाला
News Image

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा उर्दू भाषा में अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करने का फैसला अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लेकर ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है।

ममता का दोहरा चेहरा : ओवैसी पटना में मीडिया से बात करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ममता बनर्जी मुसलमानों को लेकर अपना दोहरा चरित्र दिखा रही हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता सरकार द्वारा जारी किए गए 5 लाख बैकवर्ड सर्टिफिकेट्स को रद्द कर दिया था, जिनमें से 3 लाख सर्टिफिकेट्स मुसलमानों के थे। ओवैसी ने सवाल किया कि इस मुद्दे पर ममता सरकार खामोश क्यों है?

विकास के दावों पर सवाल ओवैसी ने उर्दू मैनिफेस्टो को महज एक दिखावा करार दिया है। उन्होंने कहा, उर्दू में चुनावी एजेंडा छापने से क्या होगा? उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि बंगाल की आबादी में 29 प्रतिशत मुसलमान होने के बावजूद, सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी मात्र 7 प्रतिशत है। मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में मुस्लिम समुदाय आज भी बदहाली और गरीबी का दंश झेल रहा है।

शिक्षा और साक्षरता दर पर चिंता AIMIM चीफ ने मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की कमी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में स्कूली शिक्षा छोड़ने वालों (ड्रॉपआउट) में सबसे ज्यादा संख्या मुसलमानों की है। बच्चियों की साक्षरता दर भी बेहद कम है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी केवल वोट बैंक की राजनीति करती है, लेकिन वास्तविक विकास से मुसलमानों को दूर रखा गया है।

भाजपा का हमला: तुष्टीकरण की पराकाष्ठा सिर्फ ओवैसी ही नहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस मुद्दे पर टीएमसी को घेरा है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की पार्टी लंबे समय से भाषाई और तुष्टीकरण की राजनीति करती आई है। गिरिराज सिंह ने दावा किया कि बंगाल की जनता अब ममता का असली चेहरा पहचान चुकी है और आने वाले चुनाव में सत्ता परिवर्तन के जरिए इसका करारा जवाब देगी।

सियासी बयानबाजी का दौर बंगाल की राजनीति में उर्दू मैनिफेस्टो पर छिड़ी यह बहस इस बात का संकेत है कि आने वाले चुनाव में ध्रुवीकरण एक बड़ा मुद्दा बनने वाला है। एक तरफ जहां टीएमसी इसे अपनी समावेशी नीति बता रही है, वहीं विपक्ष इसे तुष्टीकरण का एक और हथकंडा करार देकर जनता के बीच ले जा रहा है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

आवेश खान की एक गलती पड़ती भारी: ऋषभ पंत की शानदार पारी पर मंडराया था डेड बॉल का खतरा

Story 1

वैभव सूर्यवंशी की उम्र पर मचा बवाल: क्या वाकई एज फ्रॉड में फंसे हैं टीम इंडिया के उभरते सितारे?

Story 1

मौत को मात देकर लौटी ट्रैकर : जंगल में 4 दिन, न खाना न पानी, और बस जुगनुओं का सहारा

Story 1

ODI World Cup 2027: टीम इंडिया का अगला संकटमोचक मिल गया? पडिक्कल की फॉर्म ने मचाई हलचल

Story 1

दिल्ली-NCR में मौसम का मिजाज बदला: झमाझम बारिश के साथ येलो अलर्ट, अगले 48 घंटे रहें सावधान

Story 1

अमरावती का उदय: एक स्मार्ट कैपिटल के रूप में फिर से संवर रहा आंध्र प्रदेश का भविष्य

Story 1

चांद के उस पार प्यार : जब आंखों में आंसू और हाथों में दिल लिए भावुक हो गए एस्ट्रोनॉट

Story 1

ब्रॉक लैसनर की बढ़ गई मुसीबतें: ट्रिपल एच पर हुआ हमला, WWE करियर पर मंडराया खतरा?

Story 1

चांद का अंधेरा और 40 मिनट का सस्पेंस: आर्टेमिस-2 ने तोड़ा 56 साल पुराना इतिहास

Story 1

IPL 2026: दिल्ली कैपिटल्स vs गुजरात टाइटंस मैच के लिए मेट्रो का तोहफा, देर रात तक चलेंगी ट्रेनें