सब बर्बाद: खेतों पर बिछी ओलों की सफेद चादर, उत्तर और मध्य भारत में किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
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अप्रैल का महीना सामान्यतः राहत और तैयारी का समय होता है, लेकिन इस बार कुदरत का कहर किसानों के लिए काल बनकर टूटा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और झारखंड समेत कई राज्यों में बेमौसम बारिश और भीषण ओलावृष्टि ने फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है।

राजस्थान: लहलहाती फसलें मिट्टी में मिलीं

राजस्थान के कई जिलों में ओलों ने ऐसा तांडव मचाया कि खेत किसी बर्फीली पहाड़ी जैसे दिखने लगे। श्रीगंगानगर और भीलवाड़ा में कटी हुई फसलें भीग गईं और खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गईं। सूरतगढ़ के कई सब-तहसील क्षेत्रों में गेहूं की बालियां टूट गईं और ईसबगोल की फसल पूरी तरह चौपट हो गई। लालसोट और सीकर में भी रबी की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों के सामने साल भर का संकट खड़ा हो गया है।

झारखंड: सब्जी उत्पादक किसान हताश

झारखंड में अचानक बदले मौसम और वज्रपात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गिरिडीह और पूर्वी सिंहभूम में तरबूज, टमाटर, खीरा और शिमला मिर्च की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। किसानों ने लाखों रुपये की लागत लगाई थी, लेकिन बर्फबारी जैसी ओलावृष्टि ने सब कुछ तबाह कर दिया। कृषि मंत्री ने नुकसान के आकलन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, लेकिन किसान अब जल्द मुआवजे की राह ताक रहे हैं।

मध्य प्रदेश और यूपी: 50 साल का रिकॉर्ड टूटा

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 50 सालों का मौसमी रिकॉर्ड टूट गया। शिवपुरी, श्योपुर और विजयपुर में 10-15 मिनट की ओलावृष्टि ने 3,000 हेक्टेयर से अधिक की गेहूं और चने की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इधर, उत्तर प्रदेश में नोएडा, आगरा और रामपुर जैसे इलाकों में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चली आंधी ने गेहूं की खड़ी फसलों को पूरी तरह गिरा दिया है। जेवर के विधायक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल सर्वे कराकर मुआवजे की मांग की है।

उत्तराखंड: नगदी फसलों को भारी नुकसान

उत्तरकाशी की यमुना और गंगा घाटी में तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश ने नगदी फसलों को तबाह कर दिया है। धनिया, प्याज और मटर की पैदावार पर निर्भर रहने वाले किसानों के लिए यह मौसम किसी आफत से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि फसलों के गिरने और खेतों में पानी जमा होने से पौधों में सड़न का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे आने वाले दिनों में और अधिक नुकसान की आशंका है।

फिलहाल, प्रभावित राज्यों के किसान अपनी बर्बाद फसलों को देखकर सरकार से जल्द मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं ताकि वे अपने उजड़ते भविष्य को किसी तरह संभाल सकें। प्रशासन ने कई जगह सर्वे के आदेश दिए हैं, लेकिन धरातल पर राहत मिलने की प्रक्रिया अभी मंथर है।

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