नासा का आर्टेमिस-2 मिशन अब अपने सबसे रोमांचक और चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। पांच दिन की यात्रा के बाद मिशन ने अपना आधा रास्ता सफलतापूर्वक तय कर लिया है। अब अंतरिक्ष यात्रियों की खिड़कियों से पृथ्वी एक छोटे बिंदु जैसी दिख रही है, जबकि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव और उसकी उबड़-खाबड़ सतह पहले से कहीं अधिक स्पष्ट और विशाल नजर आ रही है।
बदलते मंजर के साथ बढ़ती चुनौतियां मिशन कमांडर रीड वाइसमैन ने बताया कि टीम अब मानव इतिहास में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने के रिकॉर्ड के बेहद करीब है। जैसे-जैसे वे चांद के करीब पहुंच रहे हैं, जिम्मेदारी और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं। अंतरिक्ष के इस गहरे शून्य में एक छोटी सी तकनीकी चूक भी पूरे मिशन के लिए भारी पड़ सकती है।
लूनर लू की समस्या फिर सिरदर्द बनी खूबसूरत नजारों के बीच मिशन के लिए एक पुरानी मुसीबत फिर से खड़ी हो गई है। स्पेसक्राफ्ट का टॉयलेट सिस्टम (लूनर लू) दोबारा काम नहीं कर रहा है। इंजीनियरों को संदेह है कि अत्यधिक ठंड के कारण पाइपलाइन में बर्फ जम गई है, जिससे कचरा निकासी बाधित हो रही है। सक्शन प्रेशर में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण एस्ट्रोनॉट्स को मजबूरन कंटिंजेंसी बैग्स का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
पानी का संकट और सावधानी टॉयलेट के साथ-साथ वाटर डिस्पेंसर के वाल्व में आई खराबी ने भी नासा की चिंता बढ़ा दी है। एहतियात के तौर पर एस्ट्रोनॉट्स को पानी के सीमित उपयोग की सलाह दी गई है। उन्होंने आपातकालीन स्थिति के लिए सीरिंज और स्ट्रॉ की मदद से लगभग 7 लीटर पानी अलग से जमा कर लिया है, ताकि मुख्य आपूर्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
अब चांद के अंधेरे हिस्से की बारी सभी तकनीकी बाधाओं के बावजूद, ओरियन स्पेसक्राफ्ट अपनी निर्धारित गति और पथ पर बना हुआ है। नासा के मिशन कंट्रोल सेंटर से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें सोमवार पर टिकी हैं, जब स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा के उस पिछले हिस्से (Far Side) से गुजरेगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।
सीख का सफर है आर्टेमिस-2 यह मिशन केवल चांद तक पहुंचने की दौड़ नहीं है, बल्कि भविष्य के मंगल मिशनों के लिए एक कठिन परीक्षा भी है। टॉयलेट की समस्या और अन्य छोटी-बड़ी दिक्कतें यह बता रही हैं कि लंबी अंतरिक्ष यात्राओं के लिए अभी सिस्टम को और अधिक पुख्ता करने की आवश्यकता है। फिलहाल, टीम का हौसला बुलंद है और वे इस ऐतिहासिक फ्लाईबाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
This view just hits different 🌍
— NASA (@NASA) April 4, 2026
@Astro_Christina and @astro_reid take a moment to look back at Earth as they continue deep into space toward the Moon. pic.twitter.com/NMDeLj256K
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