ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर पिछले एक महीने में चार बार हमले हो चुके हैं। अमेरिका और इजराइल की ओर से किए जा रहे ये हमले इस जंग को एक बेहद खतरनाक और अनियंत्रित मोड़ पर ले आए हैं। अब सवाल केवल सैन्य जीत-हार का नहीं, बल्कि एक बड़े परमाणु हादसे का है।
तेहरान से खाड़ी देशों तक फैलेगा रेडियोधर्मी जहर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने चेतावनी दी है कि यदि बुशेहर प्लांट पर कोई सीधा और घातक प्रहार होता है, तो उसका असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। रेडियोधर्मी रिसाव (रेडिएशन लीक) हवाओं और समुद्री धाराओं के जरिए खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों की राजधानियों तक फैल सकता है। यह एक ऐसी आपदा होगी जो सीमाओं को नहीं मानेगी और पूरे क्षेत्र को दशकों के लिए रहने लायक नहीं छोड़ेगी।
IAEA की चुप्पी पर उठ रहे सवाल ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निष्क्रियता पर कड़े सवाल उठाए हैं। हालांकि IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने स्पष्ट किया है कि परमाणु संयंत्रों पर हमले किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में यह एजेंसी केवल बयानों तक सीमित दिख रही है। अब तक रेडिएशन का स्तर सामान्य बताया जा रहा है, लेकिन बार-बार हो रहे हमलों से सुरक्षा घेरा कभी भी टूट सकता है।
मिसाइल का एक गलत निशाना, लाखों की जान विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे बड़ा खतरा परमाणु बम नहीं, बल्कि परमाणु संयंत्रों के संवेदनशील हिस्सों जैसे रिएक्टर कोर, स्पेंट फ्यूल पूल या कूलिंग सिस्टम पर गिरने वाली कोई भूलवश मिसाइल है। यदि इनमें से किसी भी हिस्से में क्षति होती है, तो यह चेरनोबिल जैसी आपदा को जन्म दे सकता है। इससे न केवल लाखों लोगों की जान खतरे में पड़ेगी, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (Marine Ecosystem) पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
डिमोना पर ईरान की नजर: विनाश का चक्र यह संघर्ष एकतरफा नहीं है। ईरान भी इजराइल के डिमोना न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर को लगातार निशाना बना रहा है। मार्च के अंत में नेगेव रेगिस्तान में गिरी ईरानी मिसाइलें डिमोना के काफी करीब थीं। माना जाता है कि डिमोना में इजराइल के 90 से अधिक परमाणु हथियार मौजूद हैं। यदि इन पर कोई प्रहार सफल होता है, तो इसका असर हिरोशिमा और नागासाकी की तुलना में 100 गुना अधिक विनाशकारी हो सकता है, जो पूरे मध्य पूर्व का नक्शा बदल देगा।
यूक्रेन जैसा परमाणु जुआ ईरानी विदेश मंत्री ने इसकी तुलना यूक्रेन के जेपोरिजिया (ZNPP) परमाणु संयंत्र पर हो रहे हमलों से की है। जिस तरह जेपोरिजिया में मिसाइलें और ड्रोन प्लांट के करीब गिर रहे हैं, वही स्थिति अब बुशेहर में दोहराई जा रही है। परमाणु संयंत्रों को युद्ध का अखाड़ा बनाना वैश्विक सुरक्षा के लिए एक खतरनाक जुआ है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है।
Remember the Western outrage about hostilities near Zaporizhzhia Nuclear Power Plant in Ukraine?
— Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) April 4, 2026
Israel-U.S. have bombed our Bushehr plant four times now. Radioactive fallout will end life in GCC capitals, not Tehran.
Attacks on our petrochemicals also convey real objectives. pic.twitter.com/onGCgkJFjt
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