होर्मुज खोलो वरना आएगी तबाही: ट्रंप की ईरान को 48 घंटे की फाइनल वॉर्निंग
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि उनके पास अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। इस समयावधि में ईरान को या तो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोलना होगा या डील के लिए आगे आना होगा। ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान को भीषण तबाही का सामना करना पड़ेगा।

डेडलाइन बढ़ी, लेकिन सब्र खत्म

ट्रंप ने 26 मार्च को ईरान को 10 दिन की मोहलत दी थी, जो अब समाप्त होने वाली है। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने खुद बिचौलियों के जरिए संपर्क कर समय बढ़ाने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा, ईरानी अधिकारियों ने अपने एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाने के लिए सात दिन मांगे थे, लेकिन मैंने उन्हें 10 दिन दिए। अब और समय नहीं दिया जाएगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने कदम नहीं उठाया, तो वे उनके पावर प्लांट्स को पूरी तरह तबाह कर देंगे।

ईरान का इनकार और पाषाण काल का डर

ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका के प्रस्ताव को एकतरफा और अन्यायपूर्ण बताकर खारिज कर दिया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका के लक्ष्य लगातार बदल रहे हैं—कभी वे मिसाइल क्षमताओं की बात करते हैं, तो कभी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को खत्म करने की धमकी देते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराते हुए कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने उनके बुशहर प्लांट पर हमले कर रेडिएशन का खतरा पैदा कर दिया है।

क्या शांति की गुंजाइश बची है?

इस तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान की भूमिका अहम हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री इशाक डार ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में एक दल बातचीत के लिए तैयार है। शुरुआत में ईरान ने ट्रंप की पाषाण काल में भेजने वाली धमकी के कारण बातचीत से इनकार कर दिया था, लेकिन अब अराघची ने संकेत दिए हैं कि ईरान सम्मानजनक शर्तों पर शांति वार्ता के लिए तैयार है।

होर्मुज क्यों है महायुद्ध की धुरी?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था इस मार्ग पर निर्भर है। ट्रंप भली-भांति जानते हैं कि ईरान की कमर तोड़ने के लिए इस समुद्री रास्ते और उसके ऊर्जा ठिकानों पर नियंत्रण अनिवार्य है। 6 अप्रैल की डेडलाइन जैसे-जैसे करीब आ रही है, दुनिया की नजरें वेस्ट एशिया और मिडिल ईस्ट पर टिक गई हैं। यदि अगले 48 घंटों में कोई कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो यह संकट एक बड़े महायुद्ध में बदल सकता है।

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