क्या कोई पार्टी अपने सांसद को पद से हटा सकती है? राघव चड्ढा बनाम AAP विवाद में संविधान का सच
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आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा राज्यसभा में उपनेता पद से राघव चड्ढा को हटाए जाने के बाद से सियासी गलियारों में हलचल तेज है। उनकी जगह पंजाब से सांसद अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई है। इस घटना ने एक बड़ा संवैधानिक सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोई राजनीतिक दल अपनी मर्जी से सांसद की सदस्यता खत्म कर सकता है?

राघव चड्ढा पर क्यों गिरी गाज? एक समय अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले राघव चड्ढा और पार्टी के बीच दूरियां अब जगजाहिर हैं। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर न केवल उनका पद छीना, बल्कि यह भी मांग की कि उन्हें पार्टी कोटे से संसद में बोलने का मौका न दिया जाए। AAP नेताओं का आरोप है कि चड्ढा ने विपक्ष के साथ वॉकआउट नहीं किया और भाजपा के साथ कथित तौर पर समझौता किया है।

संविधान क्या कहता है? भारतीय संविधान स्पष्ट है—किसी भी राजनीतिक दल के पास अपने सांसद को सदन से निष्कासित करने का अधिकार नहीं है। राज्यसभा सांसद का चुनाव विधानसभा सदस्यों द्वारा होता है और 6 साल का उनका कार्यकाल संवैधानिक रूप से सुरक्षित है। दल का नियंत्रण केवल सदन के भीतर की भूमिकाओं (जैसे उपनेता का पद) या भाषण के समय तक ही सीमित है।

सीधे शब्दों में कहें तो, आम आदमी पार्टी चड्ढा की संगठनात्मक भूमिका को सीमित कर सकती है, लेकिन उन्हें सांसद पद से नहीं हटा सकती। हालांकि, पार्टी कोटे से समय न मिलने पर राघव चड्ढा की स्थिति सदन में एक स्वतंत्र सदस्य जैसी हो सकती है।

AAP नेताओं के गंभीर आरोप पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने चड्ढा पर चौतरफा हमले किए हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सौरभ भारद्वाज जैसे नेताओं का दावा है कि चड्ढा ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया और केंद्र सरकार के खिलाफ जरूरी मुद्दों पर चुप्पी साधे रखी। उन पर आरोप है कि उन्होंने TMC के महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से मना किया और विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों से भी खुद को अलग रखा।

राघव का घातक पलटवार सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने बचाव में कहा, जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिला, मैंने मध्य वर्ग के टैक्स का बोझ, डेटा एक्सपायरी और पैटर्निटी लीव जैसे जनहित के मुद्दे उठाए हैं। कोई मेरी आवाज क्यों दबाना चाहता है?

चड्ढा ने घायल हूं, इसलिए घातक हूं का डायलॉग बोलते हुए पार्टी के दावों को सरासर झूठ करार दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे टैक्सपेयर के पैसे से चलने वाली संसद में जनता की आवाज उठाते रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव का सामना क्यों न करना पड़े।

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