पुल और इमारतें दोबारा बन जाएंगी, लेकिन अमेरिका की साख हमेशा के लिए मिट्टी में मिल गई
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मिडिल ईस्ट में दहकती जंग का 35वां दिन मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को आज 35 दिन पूरे हो गए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक घातक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस हमले में ईरान के कई शीर्ष सैन्य अधिकारी और नेता भी मारे जा चुके हैं।

ईरान का B1 पुल तबाह, ट्रंप ने दी बातचीत की पेशकश गुरुवार रात अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण बी1 पुल को मिसाइल हमले में पूरी तरह नष्ट कर दिया। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमले का वीडियो साझा किया और ईरान को एक बार फिर शांति समझौता करने की सलाह दी। ट्रंप के इस रुख को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है।

ईरान का दो-टूक जवाब: आत्मसमर्पण असंभव अमेरिकी दबाव के सामने ईरान ने झुकने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, पुल और नागरिक ढांचों पर हमले से ईरानी जनता घुटने नहीं टेकेगी। यह केवल अमेरिका की हताशा को दर्शाता है। हम अपने हर पुल और इमारत को पहले से अधिक मजबूती से खड़ा करेंगे, लेकिन अमेरिका ने इस युद्ध में जो अपनी साख गंवाई है, वह कभी वापस नहीं आएगी।

क्या दुनिया को पाषाण युग में धकेलना चाहते हैं ट्रंप? अराघची ने चेतावनी भरे लहजे में पूछा कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति और वहां की जनता वाकई इतिहास को पीछे ले जाना चाहते हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक युग और पाषाण युग में केवल तेल और गैस का ही अंतर है। ईरान का इशारा साफ है—यदि मध्य पूर्व में हमले नहीं रुके, तो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति ठप हो जाएगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था अंधेरे में डूब जाएगी।

बदले की आग में जल रहा ईरान अपने सर्वोच्च नेता की मौत और बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों के बावजूद ईरान लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है। अराघची के बयान से साफ है कि ईरान अब केवल रक्षात्मक मुद्रा में नहीं है, बल्कि वह अमेरिका को वैश्विक स्तर पर नैतिक रूप से घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है। आने वाले दिन इस युद्ध को किस दिशा में ले जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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