डॉलर के मुकाबले रुपया 95 के पार: वित्त मंत्री ने कहा - भारतीय अर्थव्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत
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नई दिल्ली: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में जारी गिरावट और इसके 95.20 के स्तर तक फिसलने के बीच केंद्र सरकार ने देश की आर्थिक स्थिति पर बड़ा बयान दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों और आम जनता को घबराने की जरूरत नहीं है।

वित्त मंत्री का भरोसा: रुपया बिलकुल ठीक लोकसभा में रुपये की मौजूदा स्थिति पर जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था बेहद मजबूत स्थिति में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारतीय रुपया काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और यह बिलकुल ठीक स्थिति में है।

वैश्विक कारकों का असर, न कि घरेलू कमजोरी वित्त मंत्रालय के अनुसार, रुपये में आई यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है। 28 फरवरी से शुरू हुए वेस्ट एशिया संघर्ष के चलते वैश्विक स्तर पर मुद्रा बाजार में भारी अस्थिरता है। दक्षिण कोरियाई वॉन, थाई बाहट और फिलीपीन पेसो जैसी अन्य मुद्राओं में रुपये से भी ज्यादा गिरावट दर्ज की गई है।

बुनियादी ढांचे (Fundamentals) पर सरकार का जोर सरकार का मानना है कि भारत के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स अभी भी मजबूत हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के फिस्कल डेफिसिट (राजकोषीय घाटे) प्रबंधन की पूरी दुनिया सराहना कर रही है। इसके अलावा, देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त है, जो किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सक्षम है।

महंगाई में बड़ी राहत का दावा सरकार ने महंगाई के मोर्चे पर भी राहत की बात कही है। आंकड़ों के अनुसार, 2020-21 में जो रिटेल महंगाई दर 6.2% थी, वह 2025-26 (अप्रैल-फरवरी) तक घटकर मात्र 1.9% पर आ गई है। सरकार का दावा है कि जरूरी वस्तुओं की कीमतें स्थिर हैं या उनमें कमी आ रही है।

बाजार तय करता है रुपये की कीमत वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि रुपये की वैल्यू बाजार की मांग और आपूर्ति के आधार पर तय होती है। उन्होंने कहा कि सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजार पर नजर रखे हुए हैं ताकि किसी भी तरह की अत्यधिक अस्थिरता को नियंत्रित किया जा सके।

निष्कर्ष: नियंत्रण में है स्थिति चालू वित्त वर्ष में रुपया करीब 9.9% कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन सरकार इसे वैश्विक आर्थिक दबाव का परिणाम मानती है। सरकार का स्पष्ट रुख है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण रुपये की यह गिरावट उसके नियंत्रण में है और भारतीय अर्थव्यवस्था किसी भी बड़े जोखिम से सुरक्षित है।

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