बंगाल में एकला चलो की राह पर कांग्रेस: क्या ममता-बीजेपी के सियासी गणित को बिगाड़ पाएगी पार्टी?
News Image

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी बिसात बिछा दी है। पार्टी ने 284 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह राज्य की सभी 294 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया कि पार्टी किसी के साथ गठबंधन नहीं करेगी और एक भी सीट खाली नहीं छोड़ेगी।

दिग्गज चेहरों पर दांव कांग्रेस ने अपनी सूची में अनुभवी और प्रभावशाली चेहरों को तरजीह दी है। बहरामपुर से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को मैदान में उतारा गया है। वहीं, टीएमसी की पूर्व राज्यसभा सांसद मौसम नूर को मालदा के मालतीपुर से टिकट दिया गया है। इसके अलावा, ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से प्रदीप प्रसाद को उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने सीधे चुनौती पेश की है।

अकेले लड़ने के पीछे का मकसद सवाल यह है कि 2016 में 44 सीटों वाली पार्टी, जो 2021 में घटकर महज एक सीट पर सिमट गई, उसका अकेले लड़ने का क्या कारण है? कांग्रेस का तर्क है कि वह राज्य में पार्टी को पुनर्जीवित करने की लंबी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। पार्टी के पास करीब 2500 आवेदन आए थे, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने और उन्हें सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि राज्य में अब उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं है , इसलिए जो भी सफलता मिलेगी, वह मुनाफे की तरह होगी।

सियासी नफा-नुकसान का गणित जानकारों का मानना है कि कांग्रेस की इस रणनीति से सबसे बड़ा फायदा तृणमूल कांग्रेस (TMC) को हो सकता है। अगर कांग्रेस और वामदल अलग-अलग लड़ते हैं, तो ममता बनर्जी विरोधी वोट बैंक (जो मुख्य रूप से बीजेपी के साथ जाता है) का बंटवारा होगा। इससे बीजेपी को नुकसान हो सकता है।

मुस्लिम वोट बैंक पर नजर दूसरी तरफ, कांग्रेस का आक्रामक प्रचार ममता बनर्जी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगा सकता है। हालांकि, ओवैसी और अन्य छोटे दलों के सक्रिय होने से पहले ही मुस्लिम वोट बैंक को लेकर खींचतान मची है। ममता बनर्जी की कोशिश है कि कांग्रेस राज्य में ज्यादा जोर न लगाए, वरना मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में समीकरण बदल सकते हैं।

मिशन पुनरुद्धार पर कांग्रेस कांग्रेस का मिशन स्पष्ट है—उसे मौजूदा सियासी नुकसान की परवाह नहीं है। पार्टी का ध्यान इस बार अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाने और भविष्य के लिए जमीन तैयार करने पर है। देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस का यह एकला चलो रे का नारा उसे बंगाल की राजनीति में फिर से मुख्यधारा में ला पाता है या यह महज एक सांकेतिक कदम बनकर रह जाएगा।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

डांस करते रोबोट का थप्पड़ : क्या भविष्य के रोबोट इंसानों के लिए सुरक्षित हैं?

Story 1

बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी पर लगा चुनाव हाईजैक का आरोप, दिल्ली दरबार पहुंची BJP

Story 1

धुरंधर 2 को प्रोपगैंडा बताने वालों पर आगबबूला हुए अनुपम खेर, खरी-खरी सुनाते हुए कहा- दर्शक मूर्ख नहीं हैं

Story 1

हम आपका इंतजार कर रहे हैं : ईरान ने अमेरिका को दी सीधी चेतावनी, युद्ध के मुहाने पर मिडिल ईस्ट

Story 1

डांस करते हुए रोबोट का हिंसक अवतार: मासूम बच्चे को जड़ा जोरदार थप्पड़!

Story 1

वर्दी का रूतबा हटा, बेटे का प्यार दिखा: IPS केके बिश्नोई का पिता संग डांस वीडियो हुआ वायरल

Story 1

होर्मुज में तेल डिप्लोमेसी : ट्रंप का दावा, ईरान ने सम्मान में भेजे 20 जहाज

Story 1

आये हुए और लाये हुए का खेल: अखिलेश यादव ने दादरी रैली से BJP पर साधा बड़ा निशाना

Story 1

थलपति विजय का बड़ा दांव: ड्राइवर के 35 साल की निष्ठा को मिला राजनीति का टिकट, मंच पर छलके आंसू

Story 1

हुंडई का बड़ा एक्शन: 1.32 लाख लग्जरी SUV वापस मंगवाईं, पावर सीट बनीं मासूम की मौत का कारण