इस बार जीत बहुत बड़ी होगी : नामांकन के बाद स्टालिन का हुंकार, तमिलनाडु में सियासी पारा हाई
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तमिलनाडु विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, राज्य का सियासी तापमान अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को कोलाथुर सीट से अपना नामांकन दाखिल कर चुनावी रण में बिगुल फूंक दिया है।

नामांकन के बाद हुए रोड शो में उमड़ी समर्थकों की भीड़ ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार का चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और तीखा होने वाला है।

दिल्ली बनाम तमिलनाडु की जंग नामांकन के बाद स्टालिन ने बेहद आत्मविश्वास के साथ जीत का दावा किया। उन्होंने कहा, हमारी जीत इस बार शानदार होगी। मुझे पिछली तीन बार की तुलना में कहीं अधिक जनसमर्थन मिल रहा है। यह चुनाव तमिलनाडु और दिल्ली के बीच की लड़ाई है।

स्टालिन का यह बयान महज एक चुनावी दावा नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। DMK इस चुनाव को दिल्ली बनाम तमिलनाडु के नैरेटिव में ढालकर अपनी क्षेत्रीय पहचान को और मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

DMK का गठबंधन और चुनावी गणित इस बार DMK 234 में से 164 सीटों पर खुद चुनाव लड़ रही है। बाकी 70 सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी गई हैं। इसमें कांग्रेस (28), CPI और CPI(M) (5-5), VCK (8) और MDMK (4) शामिल हैं। इसके अलावा अन्य छोटे क्षेत्रीय दल भी गठबंधन का हिस्सा हैं, जो DMK के मजबूत सामाजिक आधार को दर्शाते हैं।

DMK सांसद कनिमोझी ने भी पार्टी की वापसी का भरोसा जताते हुए कहा, मुख्यमंत्री ने पिछले 5 सालों में अपने वादों से ज्यादा काम करके दिखाया है। जनता को डीएमके के सुशासन पर पूरा भरोसा है।

विपक्ष का पलटवार: वादे झूठे, काम गायब दूसरी ओर, AIADMK ने स्टालिन के सुपरस्टार मैनिफेस्टो पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेता सीटी चेल्लापांडियन ने आरोप लगाया कि 2021 के 525 वादों में से 25 भी पूरे नहीं हुए। विपक्षी दल इसे झूठे वादों और भ्रष्टाचार का पुलिंदा बता रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव से ठीक पहले लाई गई योजनाएं महज वोट बटोरने का हथकंडा हैं।

चुनावी केंद्र में वादे और नैरेटिव स्टालिन के घोषणापत्र में महिलाओं के लिए आर्थिक मदद, युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए मुफ्त सुविधाओं जैसे लोकलुभावन वादे शामिल हैं। विपक्ष इसे कॉपी-पेस्ट और स्टिकर पॉलिटिक्स करार दे रहा है।

तमिलनाडु में 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा और 4 मई को नतीजे आएंगे। यह चुनाव केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि विकास बनाम वादों और क्षेत्रीय पहचान बनाम राष्ट्रीय राजनीति की एक बड़ी परीक्षा है। स्टालिन का बड़ी जीत का दावा कितना सही साबित होगा, यह तो भविष्य ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि इस बार तमिलनाडु की राजनीति के दांव बहुत ऊंचे हैं।

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