कच्चा तेल 122 डॉलर के पार, फिर भी भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम: वित्त मंत्री का बड़ा ऐलान
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वैश्विक संकट के बीच आम आदमी को राहत मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं। कच्चे तेल की कीमत 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल के दाम 30 से 50 फीसदी तक बढ़ गए हैं। लेकिन, भारत में आम जनता को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाने का फैसला किया है।

122 डॉलर तक पहुंची आग वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि महज एक महीने में कच्चा तेल 70 डॉलर से उछलकर 122 डॉलर तक पहुंच गया है। 13 मार्च के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमत लगातार 100 डॉलर से ऊपर बनी हुई है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद से ही दुनिया भर में आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) पर गंभीर दबाव बना हुआ है, जिसका सीधा असर ग्लोबल इकॉनमी पर दिख रहा है।

PM का निर्देश: जनता पर नहीं पड़ना चाहिए बोझ वित्त मंत्री ने साफ किया कि इस वैश्विक अनिश्चितता के दौर में प्रधानमंत्री का सख्त निर्देश है कि आम नागरिक पर महंगाई का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए। सरकार बाहरी बाजार के उतार-चढ़ाव को खुद झेल रही है ताकि देश में ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल न आए।

एक्साइज ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती सरकार ने जनता को राहत देने के लिए केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में भारी कटौती की है। पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, डीजल पर लगने वाली 10 रुपये की एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह खत्म यानी शून्य कर दिया गया है। ये नए दाम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

राजकोषीय घाटे पर सरकार का मास्टर प्लान सवाल यह है कि इस कटौती से सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ेगा? इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि उत्पाद शुल्क सरकार के कुल कर राजस्व का 10% से भी कम है। राजकोषीय स्थिति को संभालने के लिए सरकार विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के खर्च को प्राथमिकता देगी। साथ ही, नॉन-टैक्स रेवेन्यू के जरिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने पर काम किया जा रहा है।

ईंधन की सप्लाई बनी रहेगी निर्बाध सरकार इस वित्तीय बोझ को इसलिए उठा रही है ताकि तेल कंपनियां बिना किसी बाधा के अंतरराष्ट्रीय बाजार से ईंधन खरीद सकें और देश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति में कोई कमी न आए। सरकार की यह नीति वैश्विक आर्थिक मंदी के दौर में भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनकर सामने आई है।

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