मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक विशेष इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन किया है।
राजनाथ सिंह करेंगे कमेटी का नेतृत्व सरकार द्वारा गठित इस उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह की कमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है। उनके साथ इस कमेटी में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हैं। इस समूह का मुख्य उद्देश्य मिडिल-ईस्ट में पैदा हुए तनाव की हर गतिविधि पर नजर रखना और देश में एनर्जी क्राइसिस को रोकने के लिए त्वरित निर्णय लेना है।
पीएम मोदी आज मुख्यमंत्रियों संग करेंगे मंथन बढ़ते संकट के मद्देनजर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देर शाम सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक करेंगे। हालांकि, जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, वहां के मुख्यमंत्रियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। बैठक का मुख्य एजेंडा तेल और गैस की सप्लाई चेन, स्टोरेज की स्थिति और आने वाले दिनों की संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा करना है।
पेट्रोल-डीजल पर राहत और एक्साइज ड्यूटी में फेरबदल देश में पेट्रोलियम उत्पादों की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बड़े आर्थिक कदम उठाए हैं। सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 3 रुपये प्रति लीटर घटा दी है, जबकि डीजल पर इसे शून्य कर दिया गया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर 21.5 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगाया गया है। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी टैक्स स्लैब में बदलाव किया गया है, जिससे विमानन क्षेत्र पर बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है।
इंडस्ट्रियल सेक्टर को बड़ी राहत औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को ऊर्जा संकट से बचाने के लिए सरकार ने गैर-घरेलू एलपीजी के आवंटन में बड़ी बढ़ोतरी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने निर्देश जारी कर राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी कोटा बढ़ाकर 70% कर दिया है, ताकि उद्योग जगत को कच्चे तेल की अस्थिरता का सामना न करना पड़े।
क्या लॉकडाउन की कोई संभावना है? सोशल मीडिया पर लॉकडाउन को लेकर चल रही चर्चाओं पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में फिलहाल ऐसी कोई स्थिति नहीं है। इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप का गठन केवल पैनिक को रोकने और भविष्य की संभावित जरूरतों को पूरा करने के लिए एक एहतियाती कदम है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है ताकि आम नागरिक के जीवन और देश की अर्थव्यवस्था पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े।
सरकार ने मिडिल ईस्ट विवाद से पैदा होने वाले मामलों पर नज़र रखने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप बनाया है। गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ दूसरे मंत्री भी इसके सदस्य हैं: सोर्स pic.twitter.com/fv3LqEBHlw
— ANI_HindiNews (@AHindinews) March 27, 2026
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