मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत सरकार ने आम जनता को महंगाई से बड़ी राहत दी है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में ऐतिहासिक कटौती का ऐलान किया है।
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना और आम आदमी की जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करना है।
सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर अब केवल 3 रुपये कर दिया है। वहीं, डीजल के मामले में सरकार ने और भी बड़ा कदम उठाते हुए एक्साइज ड्यूटी को पूरी तरह से खत्म (Nil) कर दिया है।
हाल ही में नायरा एनर्जी जैसी निजी कंपनियों ने कच्चे तेल की कीमतों के चलते दाम बढ़ाए थे, लेकिन सरकार के इस फैसले से अब पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी के कारण वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 20-25% हिस्सा प्रभावित हुआ है।
भारत अपनी कुल तेल जरूरत का 12-15% हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से आयात करता है। आपूर्ति में इस बाधा के कारण बाजार में मचे हड़कंप को थामने और तेल कंपनियों (OMCs) पर दबाव कम करने के लिए सरकार ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।
सड़क परिवहन के लिए जहां राहत दी गई है, वहीं हवाई ईंधन (ATF) के मोर्चे पर सख्ती बढ़ाई गई है। सरकार ने एविएशन फ्यूल पर 50 रुपये प्रति लीटर की नई ड्यूटी लगाई है। छूट और अन्य शुल्कों के बाद यह प्रभावी रूप से लगभग 29.5 रुपये प्रति लीटर पड़ेगी।
सरकार का स्पष्ट संकेत है कि उनका मुख्य फोकस आम नागरिक द्वारा उपयोग किए जाने वाले ईंधन की कीमतों को स्थिर रखना है।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल के निर्यात (Export) के नियमों को भी कड़ा कर दिया है। पहले कंपनियों को मिलने वाली टैक्स छूट को अब सीमित कर दिया गया है।
हालांकि, भारत ने अपने पड़ोसी देशों—नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका—को की जाने वाली सप्लाई पर छूट बरकरार रखी है। सरकार की प्राथमिकता साफ है: पहले घरेलू बाजार में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना।
Govt cuts excise duty to Rs 3 a litre on petrol, to nil on diesel pic.twitter.com/E3S53qyWvZ
— Press Trust of India (@PTI_News) March 27, 2026
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