हॉर्मुज के बाद अब आंसुओं के द्वार पर संकट: क्या ईरान बंद कर देगा दुनिया की तेल की सप्लाई?
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ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में एक बार फिर भूचाल आने वाला है। एक तरफ रूस के तेल रूट पर यूक्रेन के प्रहार जारी हैं, तो दूसरी तरफ ईरान ने अब एक और समुद्री रास्ते को बंद करने की धमकी देकर दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अगर ईरान का यह प्लान बी सफल होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में भीषण तेल संकट पैदा हो सकता है।

खार्ग द्वीप पर अमेरिका की नजर

खबरों के अनुसार, अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप पर जमीनी हमले की योजना बना रहा है। खार्ग द्वीप ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहाँ से देश का 90% तेल निर्यात होता है। इस द्वीप पर कब्जा ईरान को आर्थिक रूप से पंगु बना सकता है। इसी आर्थिक तबाही को रोकने के लिए ईरान ने अब जवाबी घेराबंदी शुरू कर दी है।

क्या है आंसुओं का द्वार (बाब अल-मंदेब)?

ईरान अब बाब अल-मंदेब को निशाना बनाने की बात कर रहा है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है आंसुओं का द्वार । यह लाल सागर का एंट्री पॉइंट है जो इसे अदन की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह मात्र 30 किलोमीटर चौड़ा संकरा समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दुनिया के लिए क्यों है यह खतरनाक?

बाब अल-मंदेब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग रूट है। वैश्विक तेल व्यापार का 12% और एलएनजी व्यापार का 8% इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार इस रूट से होता है। अगर होर्मुज स्ट्रेट के बाद यह रास्ता भी बंद होता है, तो दुनिया की कुल तेल सप्लाई का करीब 32% हिस्सा ठप हो सकता है।

यूरोप और भारत पर सीधा असर

इस संकट का सबसे बुरा असर यूरोपीय देशों पर पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रूट पर सबसे अधिक निर्भर हैं। भारत और चीन के लिए भी यह बड़ी चुनौती है, क्योंकि रूस से आने वाला तेल बड़ी मात्रा में इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। यदि यह रूट बंद हुआ, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप का चक्कर लगाना पड़ेगा, जिससे यात्रा में 2 से 3 हफ्ते का अतिरिक्त समय और भारी शिपिंग लागत बढ़ जाएगी।

ईरान का प्लान बी और हूती विद्रोहियों की भूमिका

ईरान का यह रूट भौगोलिक रूप से 2,500 किलोमीटर दूर है, लेकिन यमन में मौजूद ईरान-समर्थित हूती विद्रोही ईरान की ताकत हैं। हूतियों के पास एंटी-शिप मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं। गाजा युद्ध के दौरान हूतियों ने पहले भी इस रूट पर जहाजों को निशाना बनाकर स्वेज नहर के ट्रैफिक को 70% तक गिरा दिया था। अब हूती बस ईरान के इशारे का इंतजार कर रहे हैं, जो पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक अंधकार में धकेल सकता है।

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