ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ी खबर: क्या खत्म हो जाएगा तेल और गैस का भंडार?
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मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इस बीच, भारत में तेल और एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। इन अफवाहों पर पूर्णविराम लगाते हुए भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है।

अफवाहों पर सरकार का कड़ा रुख सरकार ने स्पष्ट कहा है कि ईरान-इजरायल युद्ध के कारण जो अनिश्चितता बनी है, उस पर भारत की पैनी नजर है। कुछ राज्यों में घबराहट में की जा रही खरीदारी (Panic Buying) पर सरकार ने चिंता जाहिर की और इसे पूरी तरह आधारहीन बताया है। सरकार ने साफ किया है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों और ईंधन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जनता को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।

दो महीने का फुल बैकअप तैयार सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, हर भारतीय के लिए अगले दो महीने की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित है। कच्चे तेल की खरीदारी को लेकर अगले दो महीने के लिए सौदे पहले ही पक्के किए जा चुके हैं। यानी वैश्विक स्तर पर हालात कैसे भी हों, भारत पर इसका तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा।

रिफाइनरियां फुल कैपेसिटी पर काम कर रही हैं पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार होने के कारण पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति में कोई बाधा नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि घरेलू रिफाइनरी उत्पादन में 40% की बढ़ोतरी की गई है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई है।

LPG और CNG की स्थिति एलपीजी की कमी की खबरों को नकारते हुए सरकार ने कहा कि रोजाना 50 लाख से ज्यादा सिलेंडर डिलीवर किए जा रहे हैं। वहीं, सीएनजी (CNG) और पीएनजी (PNG) उपभोक्ताओं के लिए भी राहत की खबर है। डी-पीएनजी और सीएनजी-ट्रांसपोर्ट के लिए 100% आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का 80% हिस्सा मिल रहा है।

क्या करें आम नागरिक? सरकार ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की भ्रामक सूचनाओं या सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करें। सभी पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियां सामान्य रूप से काम कर रही हैं। पैनिक बाइंग से केवल रिटेल आउटलेट्स पर अनावश्यक भीड़ बढ़ रही है, जिसका कोई ठोस कारण नहीं है। भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित हाथों में हैं।

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