सफलता की चमक अक्सर उसके पीछे छिपे संघर्षों को छिपा लेती है। प्रियंका वर्गाडिया की कहानी उन लाखों छात्रों के लिए एक मशाल है, जो अपनी असफलताओं से हार मान लेते हैं। दो बार आईआईटी (IIT) प्रवेश परीक्षा में फेल होने वाली प्रियंका आज टेक जगत की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट में लीडरशिप भूमिका निभा रही हैं।
आईआईटी का टूटा सपना पर हौसला नहीं साल 2000 में प्रियंका ने इंजीनियर बनने का सपना देखा था, लेकिन 2004 और 2005 में लगातार दो बार आईआईटी में मिली असफलता ने उनके आत्मविश्वास को झकझोर दिया। वे मायूस होने के बजाय एक साधारण कॉलेज से बीटेक करने के लिए आगे बढ़ीं। लेकिन उनके संघर्ष का असली इम्तिहान तो तब शुरू हुआ जब उन्होंने विदेश जाने का फैसला लिया।
पिता का कर्ज और अनिश्चित भविष्य 2009 में अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया (UPenn) जाने के लिए प्रियंका के पिता ने अपनी जमीन गिरवी रख दी और 40 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज लिया। जब वे अमेरिका पहुंचीं, तो उनके कंधे पर डिग्री से ज्यादा उस कर्ज को चुकाने का बोझ था। 2010 में जब उनके पास कोई अच्छा जॉब ऑफर नहीं था, तब उन्होंने एक छोटे से स्टार्टअप में क्वालिटी इंजीनियर के रूप में करियर शुरू किया। उस दौर में उनके साथ के लोग बड़ी कंपनियों में काम कर रहे थे, लेकिन प्रियंका ने धैर्य नहीं खोया।
करियर का टर्निंग पॉइंट 2013 में कस्टमर-फेसिंग इंजीनियरिंग में कदम रखना उनके करियर का सबसे बड़ा बदलाव साबित हुआ। उनकी मेहनत रंग लाई और 2017 में गूगल ने उन्हें खुद संपर्क किया। वहां उन्होंने डेवलपर एडवोकेसी में अपनी पहचान बनाई और गूगल क्लाउड के ऑपरेशन्स का नेतृत्व किया। इसके बाद 2024 में माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें डेवलपर स्ट्रैटेजी के लिए लीडर की भूमिका सौंपी।
सफलता का नया शिखर प्रियंका वर्गाडिया का सफर यहीं तक सीमित नहीं रहा। 2025 में उन्होंने दुनिया के टॉप बिजनेस स्कूलों में शुमार व्हार्टन (Wharton) से एमबीए पूरा किया। वे एक बेस्ट-सेलर लेखिका हैं और टेड टॉक्स (TED Stage) पर अपनी प्रेरक कहानी साझा कर चुकी हैं।
आज, जो लड़की कभी आईआईटी में न होने को दुनिया का अंत मानती थी, वह आज माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के लिए रणनीतियां बना रही है। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि डिग्री से ज्यादा आपका एटीट्यूड और निरंतर प्रयास ही आपकी सफलता की असली नींव रखते हैं।
I failed IIT twice. Took loans I couldn t afford. Started as a Quality Engineer while my friends climbed faster. 25 years later, here s the timeline:
— Priyanka Vergadia (@pvergadia) December 29, 2025
2000: Decided to become an Engineer from IIT
2004: Failed to get into IIT
2005: Failed to get into IIT a second… pic.twitter.com/HIr7US3rjx
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