नासिक: नासिक के कथित ढोंगी बाबा अशोक खरात का मामला अब महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़े सिरदर्द बन गया है। इस मामले में न केवल अंधविश्वास की डरावनी परतें खुल रही हैं, बल्कि राज्य के शीर्ष राजनेताओं के नाम भी उछल रहे हैं।
5 नरबलि का खौफनाक खुलासा अशोक खरात को नासिक सत्र न्यायालय में पेश किया गया, जहां पुलिस और अभियोजन पक्ष ने चौंकाने वाला दावा किया। सरकारी वकील के अनुसार, इस बात का गहरा संदेह है कि खरात ने अब तक 5 नरबलि (Human Sacrifice) दी हैं। पुलिस ने इस मामले की गहन जांच के लिए 7 दिन की रिमांड की मांग की थी, जिसके बाद अदालत ने आरोपी को 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
कांग्रेस नेता का सनसनीखेज दावा कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सकपाल ने इस पूरे प्रकरण को राज्य सरकार के लिए एक बड़ा संकट बताया है। सकपाल का आरोप है कि अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाए, तो महाराष्ट्र मंत्रिमंडल के करीब एक दर्जन मंत्री और दो दर्जन अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे हो सकते हैं।
ब्लैकमेलिंग का हथियार बना बाबा? सकपाल ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि सरकार को 6 महीने पहले ही खरात की अघोरी गतिविधियों की जानकारी थी। आरोप है कि फडणवीस अब इस जानकारी का इस्तेमाल अपने ही सहयोगी दलों और विरोधियों को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहे हैं। सकपाल का तर्क है कि जब सहयोगी दलों के कुछ नेताओं ने फडणवीस को कुर्सी से हटाने के लिए बाबा की मदद ली, तभी सरकार हरकत में आई।
राजनीतिक संरक्षण और फंडिंग के आरोप कांग्रेस नेता ने 2018 के एक बड़े आर्थिक लेनदेन की ओर इशारा किया है। आरोप है कि फडणवीस सरकार के कार्यकाल के दौरान खरात के ईशानेश्वर मंदिर को 1.5 करोड़ रुपये का सरकारी फंड दिया गया था। सकपाल ने दावा किया कि उस समय मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात रहे मिलिंद बोरीकर और गृह मंत्री अमित शाह के भी बाबा के साथ संबंध रहे हैं।
चंद्रकांत पाटिल की भूमिका पर सवाल विवाद की आंच वरिष्ठ नेता चंद्रकांत पाटिल तक भी पहुंच गई है। सकपाल ने आरोप लगाया कि पाटिल के खरात के साथ घनिष्ठ संबंध थे और उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए बाबा के जरिए अघोरी पूजा का सहारा लिया था।
आगे क्या? अशोक खरात की 5 दिन की पुलिस हिरासत अब कई बड़े राज उगल सकती है। महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल एक ढोंगी बाबा तक सीमित है या इसके पीछे सत्ता का कोई गहरा और काला गलियारा है। फिलहाल, इस खुलासे ने राज्य में राजनीतिक हलचल मचा दी है।
सरकारने भोंदू बाबा अशोक खरात प्रकरणात प्रामाणिकपणे कारवाई केली तर डझनभर मंत्री आणि दोन डझन अधिकारी जेलमध्ये जातील
— Harshwardhan Sapkal (@INCHarshsapkal) March 25, 2026
अशोक खरातच्या इशानेश्वर मंदिराला देवेंद्र फडणवीस यांच्या सरकारने २०१८ साली १.५ कोटी रुपयांचा निधी दिला होता.
फडणवीसांच्या कार्यालयात त्यावेळी कार्यरत असणारे व आता… pic.twitter.com/bxVUo8LqOO
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