ये तीन शर्तें मानो, वरना जंग जारी रहेगी : ट्रंप के लिए ईरान की कड़ी चुनौती
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अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही जंग रोकने के लिए बातचीत का दावा कर रहे हों, लेकिन ईरान के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि युद्ध विराम तभी संभव है जब उसकी तीन प्रमुख शर्तें मानी जाएंगी।

ईरान की तीन बड़ी शर्तें

सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार और आईआरजीसी के पूर्व कमांडर मोहसिन रजाई ने एक इंटरव्यू में ईरान की मांगें सामने रखी हैं। ये शर्तें सीधे तौर पर वाशिंगटन को चुनौती देती हैं:

  1. आर्थिक प्रतिबंधों का अंत: ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाया जाए।
  2. नुकसान की भरपाई: अमेरिकी सैन्य हमलों में ईरान को जो भी आर्थिक और बुनियादी ढांचागत नुकसान हुआ है, अमेरिका उसकी पूरी भरपाई करे।
  3. हस्तक्षेप की गारंटी: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों या क्षेत्रीय सुरक्षा में कभी हस्तक्षेप नहीं करेगा।

ईंट का जवाब पत्थर से

मोहसिन रजाई ने ईरान का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह 33 दिन की नहीं, बल्कि 33 साल की लड़ाई है, जिसे अब हमेशा के लिए खत्म करना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान इस बार केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ऐसी सख्त प्रतिक्रिया देगा कि भविष्य में कोई भी देश ईरान पर हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा। रजाई ने कहा, इस बार ईंट का जवाब ईंट से नहीं, पत्थर से दिया जाएगा।

ट्रंप और नेतन्याहू पर गंभीर आरोप

रजाई ने दावा किया कि जंग के शुरुआती चरण में ही इसे रोकने के आसार बन गए थे। उनके मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप युद्ध विराम के लिए तैयार थे, लेकिन बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में उन्होंने पीछे हटने का फैसला बदल दिया। रजाई का आरोप है कि अमेरिका को यह आभास हो चुका था कि इस युद्ध में उसकी जीत मुमकिन नहीं है, बावजूद इसके इजरायल के कहने पर हमले जारी रखे गए।

वार्ता के दावों पर मचा घमासान

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि तनाव कम करने के लिए वॉशिंगटन और तेहरान के बीच पर्दे के पीछे बातचीत चल रही है। इसी के चलते उन्होंने ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले पांच दिनों के लिए टालने का ऐलान भी किया था।

हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने साफ किया है कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हो रही है और युद्ध को रोकने का एकमात्र रास्ता उनकी तीन शर्तों को स्वीकार करना ही है। ईरान के इस रुख ने ट्रंप प्रशासन की कूटनीतिक कोशिशों को एक बड़े संकट में डाल दिया है।

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