पश्चिम एशिया संकट: क्या भारत के लिए बड़ा है खतरा? PM मोदी की हाई-लेवल मीटिंग में बनी सुरक्षित रहने की रणनीति
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ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक का मुख्य एजेंडा भारत की ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक सुरक्षा को सुरक्षित रखना था।

खाद्य और तेल सुरक्षा पर मंथन बैठक में पश्चिम एशिया के संघर्ष का भारत पर पड़ने वाले अल्पकालिक और दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन किया गया। सरकार की प्राथमिकता आम नागरिकों की जरूरतों—खासकर खाद्य, ऊर्जा और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद आम लोगों की जेब पर इसका न्यूनतम बोझ पड़े, इसे लेकर कई ठोस उपायों पर चर्चा हुई।

किसानों के लिए उर्वरक के वैकल्पिक इंतजाम खरीफ सीजन आने वाला है, ऐसे में किसानों को उर्वरकों (खाद) की कमी न हो, यह सरकार की बड़ी चुनौती है। बैठक में उर्वरकों के लिए पारंपरिक स्रोतों पर निर्भरता कम करने और भविष्य के लिए वैकल्पिक स्रोतों को खोजने पर जोर दिया गया। सरकार ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में बनाए गए बफर स्टॉक से खाद्य सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आएगी।

ऊर्जा और उद्योग: आयात के नए रास्ते पेट्रोलियम और गैस के साथ-साथ रसायन, औषधि (फार्मा) और पेट्रोकेमिकल उद्योगों के लिए आयात के नए स्रोत तलाशने पर मंथन हुआ। सरकार का लक्ष्य अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को इतना मजबूत बनाना है कि युद्ध के कारण किसी भी वैश्विक बाधा का असर भारतीय उद्योगों पर न पड़े। साथ ही, भारतीय उत्पादों के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने की योजना पर भी चर्चा की गई।

बिजली की कमी नहीं होगी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सरकार ने आश्वस्त किया है कि देश के सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। इससे संघर्ष के बावजूद भारत में बिजली संकट होने की संभावना को खारिज कर दिया गया है। कैबिनेट सचिव ने भी एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के जरिए विभिन्न मंत्रालयों की तैयारियों का ब्यौरा दिया।

कालाबाजारी और जमाखोरी पर कड़ी नजर प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकार के सभी विभाग आपसी तालमेल के साथ काम करें। उन्होंने राज्य सरकारों के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश दिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संकट की आड़ में कोई आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी या जमाखोरी न कर सके।

निष्कर्ष प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि दुनिया में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। सरकार अब हर उस स्थिति के लिए तैयार है, जिससे आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।

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