JDU को अलविदा कह RLD में शामिल हुए केसी त्यागी, जयंत चौधरी को किंगमेकर बनाने का संकल्प
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बिहार और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के दिग्गज नेता रहे केसी त्यागी ने अब राष्ट्रीय लोकदल (RLD) का दामन थाम लिया है। पार्टी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी की उपस्थिति में त्यागी ने औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

JDU से क्यों बनाई दूरी? केसी त्यागी लंबे समय तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे करीबी रणनीतिकारों में शामिल थे। हालांकि, पार्टी छोड़ने के पीछे उन्होंने संवाद की कमी और विकास की सीमित संभावनाओं को मुख्य कारण बताया है। त्यागी का मानना है कि JDU में अब वह राजनीतिक माहौल नहीं बचा, जो उनके विचारों के अनुकूल हो।

पद की लालसा नहीं, लक्ष्य कुछ और है RLD में शामिल होने के बाद त्यागी ने स्पष्ट किया कि उनकी नजर अब किसी चुनावी पद पर नहीं है। वे लोकसभा और राज्यसभा दोनों का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। त्यागी ने कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य जयंत चौधरी को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा नेता बनाना है। वे चाहते हैं कि जयंत भविष्य में उस भूमिका में दिखें, जैसी भूमिका कभी उनके दादा चौधरी चरण सिंह की हुआ करती थी।

पीएम बनाने की चाबी का सपना त्यागी ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि वे ऐसा समय देखना चाहते हैं जब देश का प्रधानमंत्री चुनने में जयंत चौधरी की भूमिका निर्णायक हो, ठीक वैसे ही जैसे चरण सिंह के दौर में मोरारजी देसाई को पीएम बनाने में उनकी अहम भूमिका थी।

मुस्लिम वोट बैंक और 2027 का रोडमैप त्यागी ने RLD को सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली पार्टी करार दिया। उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मुस्लिम सांसद चौधरी चरण सिंह ने बनाए थे। वहीं, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर त्यागी का लक्ष्य स्पष्ट है। वे चाहते हैं कि तब तक RLD इतनी मजबूत हो जाए कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह तय करने की ताकत जयंत चौधरी के पास हो।

राजनीति के भीष्म का लंबा सफर उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी किशन चंद त्यागी का राजनीतिक सफर करीब 50 साल पुराना है। 1989 में हापुड़ से सांसद बनकर अपनी पहचान बनाने वाले त्यागी ने हमेशा अपनी मुखरता के लिए जाने जाते हैं। JDU छोड़ने और RLD में आने के साथ ही उन्होंने अपनी राजनीति की नई पारी शुरू कर दी है, जो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

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