अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडरों के मारे जाने के बाद, ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इस तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट को गहरा कर दिया है, जिसकी तुलना 1962 के शीत युद्ध (Cold War) के चरम से की जा रही है।
चीन की रहस्यमयी चुप्पी का सच ईरान का सबसे बड़ा रणनीतिक साझेदार होने के बावजूद चीन ने इस पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साध रखी है। शी जिनपिंग की ओर से कोई भी सख्त बयान या हस्तक्षेप सामने न आना रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर रहा है। जानकारों का मानना है कि यह चुप्पी अचानक नहीं है, बल्कि चीन की एक सोची-समझी नई रणनीति का हिस्सा है।
1962 की तरह धोखे की तैयारी? रक्षा विशेषज्ञ मंगल सिंह के अनुसार, मौजूदा स्थिति 1962 जैसी है। उस समय जब दुनिया बड़े संकटों में उलझी थी, चीन ने भारत पर हमला कर दिया था। आज अमेरिका ईरान-इजरायल युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष में उलझा हुआ है, साथ ही स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ब्लॉक होने से दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही है। इस वैश्विक अस्थिरता का लाभ उठाकर चीन ताइवान पर बड़ा कदम उठा सकता है।
ताइवान बॉर्डर पर बढ़ी हलचल चीन की मंशा उसके सैन्य मूवमेंट से साफ झलक रही है। हाल ही में ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन में चीनी मिलिट्री एयरक्राफ्ट्स की मौजूदगी फिर से पीक पर है। फरवरी में जो गतिविधियां कम हुई थीं, वे अब आक्रामक रूप ले चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस मौके की ताक में है कि जब दुनिया की महाशक्तियां व्यस्त हों, वह ताइवान को अपने नियंत्रण में ले ले।
शी जिनपिंग का 2027 मिशन चीन के लिए 2027 का साल एक बड़ा पावर ट्रांजिशन इवेंट है। शी जिनपिंग अपनी विरासत को माओ त्से तुंग और डेंग जियाओपिंग जैसी महान हस्तियों की श्रेणी में शामिल करना चाहते हैं। ताइवान का विलय उनकी इस लेगेसी का सबसे बड़ा हिस्सा है। यही कारण है कि चीन ने हाल के समय में अपने रक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी की है।
अमेरिका के लिए बढ़ती मुश्किलें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने में मदद की अपील की है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अगले 48 घंटों में जलमार्ग नहीं खोला गया, तो परिणाम गंभीर होंगे। हालांकि, अमेरिका का पूरा ध्यान इस समय मध्य-पूर्व पर टिका है, जिसे चीन अपने लिए एक सेफ विंडो मानकर चल रहा है। क्या अमेरिका इस दोतरफा दबाव को झेल पाएगा, या ताइवान के रूप में उसे भारत जैसा ही कोई बड़ा धोखा मिलने वाला है? यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।
Shocking footage from this evening of a ballistic missile striking the city of Dimona in southern Israel. Home to 40,000 residents, a direct hit on a civilian neighborhood is a war crime!
— Sacha Roytman (@SachaRoytman) March 21, 2026
I’m furious that world leaders still refuse to stand up and call out Iran.
When Israel… pic.twitter.com/PYt9hvIZDd
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