धुरंधर: द रिवेंज में अतीफ का खौफ: क्या फिल्मी कहानी और हकीकत के बीच ISI कनेक्शन का कोई नाता है?
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इन दिनों फिल्म धुरंधर: द रिवेंज सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म का 7-8 मिनट का एक छोटा सा किरदार अतीफ अहमद दर्शकों का ध्यान खींच रहा है। कई लोग इस किरदार की तुलना उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया अतीक अहमद से कर रहे हैं।

फिल्म में क्या दिखाया गया है? फिल्म में अतीफ अहमद को एक ऐसे खतरनाक अपराधी के रूप में पेश किया गया है, जिसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े हैं। फिल्म का दावा है कि अतीफ पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी करता है, नकली नोटों का नेटवर्क चलाता है और यूपी की राजनीति में भी सीधा दखल रखता है। फिल्म का क्लाइमेक्स, जिसमें अतीफ की हत्या राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) की प्लानिंग का हिस्सा बताई गई है, सबसे ज्यादा विवाद बटोर रहा है।

AK-47 और पाकिस्तान का फिल्मी कनेक्शन फिल्म के शुरुआती सीन में दिखाया गया है कि कैसे बलूच माफिया के जरिए पाकिस्तान से AK-47 भारत पहुंचती हैं और फिर अतीफ के नेटवर्क तक। हालांकि यह दृश्य नाटकीय है, लेकिन हकीकत में उमेश पाल हत्याकांड की चार्जशीट में भी अतीक अहमद के ISI और लश्कर-ए-तैयबा से कनेक्शन का जिक्र आया था। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि ड्रोन के जरिए पंजाब बॉर्डर पर गिराए गए हथियारों की सप्लाई अतीक के गिरोह तक होती रही थी।

जेल से चलता था अपराध का साम्राज्य फिल्म में अतीफ को जेल के अंदर से फोन के जरिए अपना नेटवर्क चलाते हुए दिखाया गया है। असल जीवन में अतीक अहमद पर भी यही आरोप रहे हैं। देवरिया, नैनी और साबरमती जेल में रहने के दौरान भी उसने न केवल अपना नेटवर्क बनाए रखा, बल्कि उन जेलों से भी अपहरण और रंगदारी जैसे मामलों को अंजाम दिया।

क्या है नेपाल कनेक्शन का सच? फिल्म में नेपाल के रास्ते नकली नोटों (FICN) की तस्करी को अतीक के नेटवर्क से जोड़ा गया है। यह जगजाहिर है कि भारत-नेपाल सीमा का उपयोग नकली करेंसी के लिए होता रहा है। हालांकि, अतीक अहमद के खिलाफ नकली नोटों के रैकेट का कोई सीधा सार्वजनिक केस दर्ज नहीं था, लेकिन हथियारों की तस्करी में उसका नाम बार-बार सामने आता रहा है।

विवाद और हकीकत की जंग फिल्म के दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी है। कुछ लोग इसे प्रोपेगैंडा बता रहे हैं। सपा के पूर्व सांसद डॉ. एस.टी. हसन का कहना है कि किसी भी जांच एजेंसी ने आधिकारिक रूप से अतीक का ISI कनेक्शन साबित नहीं किया है, इसलिए यह फिल्म केवल राजनीतिक एजेंडा हो सकती है।

दूसरी ओर, समर्थकों का तर्क है कि माफिया के अंत की कहानी को पर्दे पर लाना जरूरी था। बेशक, धुरंधर: द रिवेंज पूरी तरह से तथ्यात्मक नहीं है, लेकिन इसने अतीक अहमद के अपराधों की उस स्याह दुनिया को फिर से चर्चा में ला दिया है, जिसके कई पन्ने उसकी मौत के साथ ही दफन हो गए थे।

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