सोशल मीडिया पर इन दिनों एक सनसनीखेज दावा तेजी से वायरल हो रहा है। इसके मुताबिक, करीब 3,000 यूक्रेनी नागरिक भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में घुस चुके हैं और वहां विद्रोही गुटों को ड्रोन तकनीक व हथियारों की ट्रेनिंग दे रहे हैं। क्या यह सच है? आइए जानते हैं सच्चाई।
केंद्र सरकार के PIB फैक्ट-चेक ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि सोशल मीडिया पर फैल रही यह खबर पूरी तरह से फेक और आधारहीन है। 3,000 यूक्रेनियों के भारत में मौजूद होने का कोई साक्ष्य नहीं है।
असमंजस की स्थिति तब पैदा हुई जब नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने म्यांमार सीमा के रास्ते भारत में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले 7 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। ये लोग मिजोरम के जरिए भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।
जांच के दौरान यह सामने आया कि गिरफ्तार किए गए ये सातों लोग म्यांमार के सशस्त्र जातीय गुटों को ड्रोन वॉरफेयर और अत्याधुनिक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दे रहे थे। इन गतिविधियों का उद्देश्य आतंकवादी तकनीकों की आपूर्ति करना था, जो सीधे तौर पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
NIA द्वारा गिरफ्तार किए गए यूक्रेनी नागरिकों में हुरबा पेट्रो, स्लीव्याक तारस, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफ़ानकिव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं। वहीं, अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू एरॉन वैनडाइक के रूप में हुई है।
अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी दूतावास इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है। वहीं, यूक्रेन ने अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर औपचारिक विरोध दर्ज कराते हुए उनकी रिहाई की मांग की है और इन दावों को खारिज किया है कि वे किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।
भले ही 3,000 यूक्रेनियों वाली खबर फर्जी हो, लेकिन पूर्वोत्तर में ड्रोन गतिविधियों और अवैध घुसपैठ को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट पर हैं। सरकार ने आम जनता से अपील की है कि बिना पुष्टि किए ऐसी भ्रामक सूचनाओं को साझा न करें और केवल आधिकारिक सूत्रों पर ही भरोसा करें।
*Some social media posts are claiming that over 3,000 Ukrainians have entered India and are hiding in the North-East to train insurgent groups, allegedly backed by US mercenaries and supplying cheap drones to terrorists.#PIBFactCheck
— PIB Fact Check (@PIBFactCheck) March 20, 2026
❌These claims are #FAKE.
🔸 7 individuals… pic.twitter.com/WVbQwVkodI
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