अगर ईरान से इतना प्यार है, तो वहां चले जाओ : सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बयान पर घिरे पाकिस्तान के शिया मौलाना
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पाकिस्तान में इन दिनों शिया समुदाय के धर्मगुरुओं और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के बीच तनातनी चरम पर है। विवाद की शुरुआत रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर्स (GHQ) में हुई एक हाई-प्रोफाइल इफ्तार बैठक से हुई, जिसमें जनरल मुनीर ने कथित तौर पर शिया मौलानाओं को बेहद अपमानजनक लहजे में ईरान चले जाने की सलाह दे दी।

इफ्तार बैठक बनी अखाड़ा 19 मार्च को आयोजित इस बैठक में करीब एक दर्जन शिया उलेमाओं को बुलाया गया था। शिया धर्मगुरु अल्लामा आगा शिफा नजफी के अनुसार, बैठक के दौरान जनरल मुनीर ने अपना पक्ष रखने के बजाय एकतरफा भाषण दिया। मुनीर ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा रोष जताया और गिलगिट-बाल्टिस्तान में सैन्य संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं पर आक्रामक रुख अपनाया।

मौलानाओं ने किया पलटवार जनरल मुनीर की ईरान चले जाओ वाली टिप्पणी से अपमानित शिया नेतृत्व ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अल्लामा आगा शिफा नजफी ने सवाल किया, क्या कभी किसी शिया ने किसी सैनिक की हत्या की है? फिर पूरे समुदाय को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना स्वयं शिया थे और इस समुदाय का देश के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान है।

सेना प्रमुख पर लगा अमेरिका-इजरायल की सेवा का आरोप विवाद तब और गहरा गया जब अल्लामा सैयद अहमद इकबाल रिजवी ने जनरल मुनीर पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कहा, आपको (मुनीर) खुद अमेरिका और इजरायल चले जाना चाहिए। आप पाकिस्तान की नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की सेवा कर रहे हैं। आपके फैसलों ने पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचाया है।

सांप्रदायिक तनाव और सेना का रुख बैठक के दौरान जनरल मुनीर ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान, सऊदी अरब पर हमला करता है, तो पाकिस्तान अपने रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब के साथ खड़ा होगा। जानकारों का मानना है कि सेना प्रमुख का यह बयान और शिया समुदाय के प्रति उनका सख्त लहजा देश के भीतर सांप्रदायिक और राजनीतिक असंतोष को और हवा दे रहा है।

उलेमाओं में गहरा असंतोष अन्य धर्मगुरुओं, जैसे अल्लामा नजीर अब्बास तकवी ने भी सेना प्रमुख के व्यवहार पर हैरानी जताई है। शिया नेताओं का कहना है कि वे अपनी वफादारी को लेकर किसी को सफाई नहीं देंगे। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी धार्मिक निष्ठा अपने पवित्र स्थलों के प्रति है, जिसे वे पाकिस्तान के प्रति अपनी देशभक्ति के साथ संतुलित करना बखूबी जानते हैं। इस पूरे प्रकरण ने पाकिस्तान के भीतर धार्मिक और सैन्य नेतृत्व के बीच एक नई दरार पैदा कर दी है।

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