क्या ईरान युद्ध के अंत के करीब है? ट्रंप ने खोले अपने पत्ते, सीजफायर को किया खारिज
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28 फरवरी को शुरू हुआ ईरान-अमेरिका संघर्ष अब तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। युद्ध की तीव्रता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अभियानों को समेटने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह युद्धविराम (सीजफायर) नहीं है।

ट्रंप का मिशन अचीव्ड प्लान ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी दी कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों के बेहद करीब है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक ढांचे और नौसेना-वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। ट्रंप का स्पष्ट मानना है कि अमेरिका ने इस संघर्ष में जीत हासिल कर ली है, इसलिए फिलहाल सीजफायर का कोई सवाल ही नहीं उठता।

क्या थे अमेरिका के प्रमुख लक्ष्य? ट्रंप ने उन बिंदुओं को गिनाया जो इस सैन्य अभियान के मुख्य आधार थे:

होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अब किसकी जिम्मेदारी? ट्रंप ने वैश्विक देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा अब उन देशों को संभालनी चाहिए जो इस मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से रोजाना 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक बाजार के लिए सबसे बड़ा व्यवधान बताया है।

सीजफायर से इनकार और आगे की रणनीति व्हाइट हाउस में मार्को रुबियो के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा, जब आप सामने वाले को पूरी तरह तबाह कर रहे हों, तो सीजफायर नहीं किया जाता। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि फ्रंटलाइन ऑपरेशन भले ही कम हों, लेकिन ईरान पर दबाव बरकरार रहेगा। अमेरिका फिलहाल ईरान में जमीनी सैनिक (Ground Troops) भेजने की योजना नहीं बना रहा है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य दबाव कम करने के मूड में भी नहीं है।

अमेरिका की भारी सैन्य तैनाती युद्ध के मोर्चे पर अमेरिका ने अपनी ताकत बढ़ा दी है। यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर पहले से तैनात हैं। अब अमेरिका अपने एम्फीबियस असॉल्ट वॉरशिप यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस बॉक्सर को तैनात कर रहा है, जिसके साथ 4000 मरीन कमांडो भी शामिल हैं। विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी तैनाती यह बताती है कि अमेरिका ईरान पर रणनीतिक दबाव बनाए रखने के लिए किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।

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